
सरकारी गलियारों में इन दिनों एक सीनियर आईपीएस अधिकारी को लेकर चर्चाएं तेज हैं। बताया जा रहा है कि साहब जल्द ही रिटायर होने वाले हैं, लेकिन रिटायरमेंट के बाद आराम करने का उनका कोई इरादा नहीं दिखाई दे रहा। चर्चा है कि सेवा से विदाई के बाद भी उनकी भूमिका कम होने के बजाय और महत्वपूर्ण हो सकती है। सरकार उन्हें प्रदेश की सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ी एक बड़ी जिम्मेदारी सौंपने की तैयारी कर रही है, जिसके चलते प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में इस संभावित नियुक्ति को लेकर लगातार चर्चा बनी हुई है।
सूत्रों के मुताबिक सरकार साहब को प्रदेश का मुख्य सुरक्षा सलाहकार बनाने की तैयारी में है। केंद्र में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार की भूमिका जिस तरह महत्वपूर्ण मानी जाती है, उसी तर्ज पर प्रदेश स्तर पर भी एक वरिष्ठ अधिकारी को सुरक्षा मामलों की जिम्मेदारी देने की योजना बताई जा रही है। माना जा रहा है कि सुरक्षा से जुड़े मामलों के साथ-साथ दिल्ली और प्रदेश सरकार के बीच महत्वपूर्ण संपर्क और समन्वय में भी साहब की भूमिका अहम हो सकती है। इस नई जिम्मेदारी को लेकर सरकार ने आवश्यक प्रक्रिया आगे बढ़ाते हुए फाइल तैयार करने के निर्देश भी दिए हैं।
अब इस प्रस्ताव को कैबिनेट की मंजूरी मिलने का इंतजार है। मंजूरी मिलते ही साहब की नई भूमिका को लेकर औपचारिक आदेश जारी किए जा सकते हैं। बताया जा रहा है कि करीब साढ़े छह साल पहले कांग्रेस सरकार के दौरान भी इसी तरह की व्यवस्था बनाने का मामला सामने आया था, लेकिन सरकार बदलने के साथ ही वह प्रस्ताव फाइलों में दबकर रह गया। अब एक बार फिर उसी तरह के पद और व्यवस्था को लेकर हलचल तेज हो गई है।
इस पूरे मामले की एक खास बात यह भी बताई जा रही है कि आने वाले समय में प्रदेश के अगले डीजीपी के चयन में भी इस सीनियर आईपीएस अधिकारी की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है। ऐसे में रिटायरमेंट के बाद उनका सरकारी करियर समाप्त होने के बजाय एक नई पारी के रूप में आगे बढ़ सकता है। यही वजह है कि प्रदेश की नौकरशाही में इस संभावित नियुक्ति को लेकर खासा उत्साह और चर्चा है। अब सभी की नजर कैबिनेट के फैसले पर टिकी है कि क्या प्रदेश को जल्द ही सुरक्षा मामलों के लिए अपना नया ‘मुख्य सुरक्षा सलाहकार’ मिलेगा।
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