
सार:
उमरिया/ राकेश दर्दवंशी: उमरिया नगर पालिका क्षेत्र के पात्र परिवार लंबे समय से भूमि के पट्टे और प्रधानमंत्री आवास योजना के लाभ का इंतजार कर रहे हैं। सर्वे, जियोटैगिंग और आवास स्वीकृति की प्रक्रिया पूरी होने के बाद भी कई हितग्राहियों को पट्टा नहीं मिल पाया है। कुछ परिवारों को आवास की पहली किस्त भी मिल चुकी है, लेकिन पट्टे की प्रक्रिया पूरी नहीं होने से आगे का काम अटक गया है।
विस्तार:
सर्वे और जियोटैगिंग के बाद भी नहीं मिला पट्टा
उमरिया। नगर पालिका उमरिया के सभी वार्डों में रहने वाले पात्र परिवारों की परेशानी कम होने का नाम नहीं ले रही है। शासन की योजनाओं के तहत झुग्गी-झोपड़ियों और कच्चे मकानों में रहने वाले परिवारों को भूमि का पट्टा और प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ मिलने की उम्मीद थी।
इसी दिशा में नगर पालिका और राजस्व विभाग की संयुक्त टीमों ने पात्र परिवारों का सर्वे किया था। सर्वे के दौरान कई परिवारों को पात्र पाया गया। इसके बाद प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत हितग्राहियों की जियोटैगिंग भी कराई गई और कई लोगों को आवास स्वीकृति पत्र जारी किए गए।
लेकिन इन प्रक्रियाओं के पूरा होने के बावजूद पात्र परिवारों को भूमि के पट्टे अब तक उपलब्ध नहीं कराए गए हैं। इससे हितग्राहियों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।
पहली किस्त मिली, आगे की प्रक्रिया को लेकर असमंजस
मामले में सबसे बड़ी परेशानी उन हितग्राहियों के सामने है, जिन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पहली किस्त भी प्राप्त हो चुकी है। पट्टे की प्रक्रिया पूरी नहीं होने के कारण अब उन्हें आवास निर्माण की आगे की कार्रवाई को लेकर असमंजस बना हुआ है।
हितग्राहियों का कहना है कि जब उनका सर्वे प्रशासन ने कराया, पात्रता निर्धारित की गई, जियोटैगिंग की गई और आवास भी स्वीकृत कर दिए गए, तो भूमि का पट्टा जारी करने में देरी क्यों हो रही है। लोगों का कहना है कि सरकारी प्रक्रिया के अलग-अलग चरण पूरे होने के बाद भी उन्हें जमीन का अधिकार नहीं मिल पाया है।
जनप्रतिनिधियों के प्रयास भी नहीं आए काम
हितग्राहियों का दावा है कि उनकी समस्या को लेकर स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने भी कई बार प्रशासन का ध्यान आकर्षित कराया है। इसके बावजूद अब तक समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो पाया है।
लोगों का कहना है कि जनप्रतिनिधियों की ओर से मामला उठाए जाने के बाद उन्हें उम्मीद थी कि प्रशासन जल्द कार्रवाई करेगा, लेकिन समय बीतने के साथ उनकी परेशानी और बढ़ती जा रही है।
पक्के मकान का सपना अधर में
लंबे समय से झुग्गी-झोपड़ियों और कच्चे मकानों में रहने वाले परिवारों के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पक्का घर मिलने की उम्मीद बड़ी राहत थी। साथ ही भूमि का पट्टा मिलने से उन्हें अपनी जमीन पर अधिकार मिलने की उम्मीद थी।
सर्वे से लेकर जियोटैगिंग और आवास स्वीकृति तक की प्रक्रिया पूरी होने के बाद हितग्राहियों को लगा था कि अब उनका वर्षों पुराना इंतजार खत्म होगा। लेकिन पट्टे की प्रक्रिया अटकने से यह उम्मीद फिलहाल निराशा में बदलती नजर आ रही है।
हितग्राही प्रशासन से मांग कर रहे हैं कि पात्र परिवारों की लंबित पट्टा प्रक्रिया जल्द पूरी की जाए, ताकि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत स्वीकृत मकानों का निर्माण भी बिना किसी बाधा के आगे बढ़ सके।
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