
उमरिया, 1 अक्टूबर 2026। मानसून के बाद विश्व प्रसिद्ध बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में 1 अक्टूबर से कोर जोन की टाइगर सफारी शुरू हो गई है। नए पर्यटन सत्र के पहले दिन ही देश के अलग-अलग हिस्सों के साथ विदेशों से भी पर्यटक बाघ और अन्य वन्यजीवों को देखने के लिए पहुंचे। सुबह से पर्यटन वाहनों की आवाजाही शुरू हो गई और पार्क क्षेत्र में पर्यटकों में खासा उत्साह देखने को मिला। मध्य प्रदेश वन विभाग के अनुसार 1 अक्टूबर से सफारी के नए प्रवेश और निकास समय भी लागू किए गए हैं।
पूजा-अर्चना के बाद सफारी वाहनों को दिखाई हरी झंडी
नए पर्यटन सत्र की शुरुआत के अवसर पर बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर अनुपम सहाय ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ बांधवाधीश की पूजा-अर्चना की। इसके बाद फीता काटकर और हरी झंडी दिखाकर सफारी वाहनों को रवाना किया गया। इस दौरान पार्क के अधिकारी-कर्मचारी, गाइड और बड़ी संख्या में पर्यटक मौजूद रहे। मानसून के दौरान कोर क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियां बंद रहती हैं। अब 1 अक्टूबर से कोर जोन दोबारा खुलने के साथ जंगल सफारी का नया सत्र शुरू हो गया है। बांधवगढ़ के कोर जोन में ताला, मगधी और खितौली क्षेत्र शामिल हैं।
पार्क प्रबंधन ने नए पर्यटन सत्र से पहले सफारी वाहनों के दस्तावेज और उनकी स्थिति की जांच भी की है। प्रबंधन के अनुसार निर्धारित मानकों को पूरा करने वाले वाहनों को ही पर्यटन क्षेत्र में प्रवेश दिया जाएगा।
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लखनऊ से पहुंचे नन्हे पर्यटक का खास स्वागत
सफारी के पहले दिन देश के अलग-अलग हिस्सों से पर्यटक बांधवगढ़ पहुंचे। लखनऊ से आए एक नन्हे पर्यटक का वन विभाग की ओर से विशेष स्वागत किया गया। फील्ड डायरेक्टर अनुपम सहाय ने बाल पर्यटक को टोपी और रिंग भेंट की। वहीं अमेरिका से आईं पर्यटक एमी ने बांधवगढ़ से जुड़ा अपना पुराना अनुभव साझा किया। उन्होंने बताया कि वर्ष 2017 में पहली बार यहां सफारी के दौरान उन्होंने प्रसिद्ध बाघिन डॉटी और उसके शावकों को देखा था। करीब नौ साल बाद वह दोबारा बांधवगढ़ पहुंची हैं।
दिल्ली से आई पर्यटक चारु सिंह ने भी जंगल के प्राकृतिक वातावरण और वन्यजीवों को करीब से देखने को लेकर उत्साह जताया। पर्यटकों के मुताबिक, बाघों के अलावा घना जंगल, प्राकृतिक सुंदरता और अन्य वन्यजीव बांधवगढ़ की सफारी को खास बनाते हैं।
नए सत्र में गाइड भी देंगे जंगल की जानकारी
बांधवगढ़ में नए पर्यटन सत्र के लिए गाइडों को भी प्रशिक्षण दिया गया है। ‘जंगल की बातों की पाठशाला’ कार्यक्रम के तहत करीब 200 गाइडों को अलग-अलग बैच में प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसमें वन्यजीवों के व्यवहार, पेड़-पौधों और जंगल की जैव विविधता से जुड़ी जानकारी शामिल है। वन विभाग का उद्देश्य है कि पर्यटकों को केवल बाघों का दीदार कराने के बजाय उन्हें जंगल और उसकी जैव विविधता के बारे में भी जानकारी दी जाए। अब नए पर्यटन सत्र के साथ बांधवगढ़ में देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों की आवाजाही बढ़ने की उम्मीद है।
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