
मध्य प्रदेश के बड़े शहरों के विकास को नई दिशा देने के लिए मेट्रोपॉलिटन रीजन मॉडल पर काम करने की तैयारी की जा रही है। भोपाल के नए मास्टर प्लान में राजधानी की मौजूदा सीमा से आगे बढ़कर आसपास के गांवों और कस्बों को भी एकीकृत विकास व्यवस्था में शामिल करने की योजना है। इसी मॉडल को जबलपुर, ग्वालियर और इंदौर के लिए भी नए विकास प्लान के साथ आगे बढ़ाने की कवायद बताई गई है। उद्देश्य शहर के अनियोजित विस्तार को नियंत्रित करना और भविष्य में बढ़ने वाली आबादी के लिए पहले से बुनियादी ढांचा तैयार करना है।
मेट्रोपॉलिटन रीजन की अवधारणा में भूमि उपयोग, परिवहन, रिंग रोड, आवास, उद्योग, ड्रेनेज और ग्रीन एरिया जैसे विषयों को लंबे समय की जरूरतों के हिसाब से निर्धारित करने की बात कही गई है। इस मॉडल में केवल मुख्य शहर की सीमाओं के भीतर विकास योजना बनाने के बजाय आसपास के ग्रामीण और कस्बाई क्षेत्रों को भी एकीकृत विकास व्यवस्था का हिस्सा बनाया जाएगा। इससे भविष्य में आवासीय कॉलोनियों, व्यावसायिक गतिविधियों, परिवहन ढांचे और संस्थागत विकास के लिए पहले से नियोजन करने की व्यवस्था हो सकती है।
ड्राफ्ट में ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट यानी सार्वजनिक परिवहन आधारित विकास को भी महत्व दिया गया है। जहां सार्वजनिक परिवहन की क्षमता अधिक होगी, वहां आवास, कार्यालय, दुकान और अन्य गतिविधियों को पास-पास विकसित करने का प्रस्ताव है। सार्वजनिक स्थानों की सुरक्षा, डिजिटल निगरानी और निजी CCTV कैमरों की नेटवर्किंग जैसी व्यवस्थाओं का भी उल्लेख है। हालांकि इस पूरी व्यवस्था की सफलता नियमों, डेटा प्रबंधन, जिम्मेदारी तय करने और प्रभावी क्रियान्वयन पर निर्भर करेगी।
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