
घुंघुटी/ राकेश दर्दवंशी: उमरिया जिले के बिरसिंहपुर पाली क्षेत्र के घुंघुटी उप स्वास्थ्य केंद्र की बदहाल स्थिति ने ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था के दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रसव पीड़ा से परेशान तुम्मी निवासी द्रोपती यादव रात करीब 11 बजे स्वास्थ्य केंद्र पहुंचीं, लेकिन बारिश के कारण केंद्र के कमरों में पानी भरा था और छत से पानी टपक रहा था। महिला को छोटे बच्चे के साथ पूरी रात पानी के बीच बैठकर गुजारनी पड़ी। सुबह कमरे के एक कोने में जगह बनाकर उनका प्रसव कराया गया।
प्रसव के लिए पहुंची महिला, सामने आई बदहाली
ग्रामीण क्षेत्रों में गर्भवती महिलाओं को सुरक्षित प्रसव की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए बनाए गए स्वास्थ्य केंद्र की स्थिति उस समय चिंता का विषय बन गई, जब प्रसव पीड़ा से जूझती एक महिला को यहां मूलभूत सुविधाओं के लिए भी संघर्ष करना पड़ा।
तुम्मी निवासी द्रोपती यादव प्रसव पीड़ा होने पर रात करीब 11 बजे घुंघुटी स्थित उप स्वास्थ्य केंद्र पहुंचीं। उम्मीद थी कि स्वास्थ्य केंद्र में उन्हें सुरक्षित माहौल और जरूरी चिकित्सा सुविधा मिलेगी, लेकिन वहां पहुंचते ही उन्हें अलग ही परेशानी का सामना करना पड़ा।
बारिश के कारण स्वास्थ्य केंद्र के कमरों में पानी भरा हुआ था। ऊपर से जर्जर छत से लगातार पानी टपक रहा था। ऐसे हालात में प्रसव के लिए पर्याप्त और सुरक्षित जगह तक उपलब्ध नहीं थी।
छोटे बच्चे के साथ रातभर पानी के बीच बैठी रहीं
द्रोपती यादव के मुताबिक, अस्पताल पहुंचने के बाद कमरे के अंदर पानी भरा हुआ था। उनके साथ छोटा बच्चा भी था। ऐसे में उन्होंने पूरी रात पानी के बीच बैठकर गुजारी।
महिला ने बताया कि रातभर उन्हें काफी परेशानी उठानी पड़ी। प्रसव पीड़ा के बावजूद उन्हें आराम करने या सुरक्षित तरीके से बैठने के लिए उचित स्थान नहीं मिल सका। सुबह जब प्रसव का समय आया तो बड़ी मुश्किल से कमरे के एक कोने में जगह बनाई गई, जहां उनका प्रसव कराया गया।
यह स्थिति ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों में प्रसूता महिलाओं के लिए उपलब्ध सुविधाओं पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
बारिश में हर बार सामने आती है भवन की बदहाली
ग्रामीणों का कहना है कि घुंघुटी उप स्वास्थ्य केंद्र की समस्या नई नहीं है। भवन लंबे समय से जर्जर हालत में बताया जा रहा है। बारिश शुरू होते ही छत से पानी टपकने लगता है और केंद्र के कई हिस्सों में जलभराव की स्थिति बन जाती है।
स्वास्थ्य केंद्र के आंगन से लेकर सड़क तक काई जमा होने की बात भी सामने आई है। इससे मरीजों और उनके परिजनों के फिसलकर गिरने का खतरा बना रहता है।
ग्रामीणों का कहना है कि जिस स्थान पर मरीजों को इलाज और राहत मिलनी चाहिए, वहां बारिश के मौसम में खुद स्वास्थ्य केंद्र ही परेशानी का कारण बन जाता है।
20 से 25 गांवों के लोग इसी केंद्र पर निर्भर
बताया जाता है कि घुंघुटी उप स्वास्थ्य केंद्र के आसपास के करीब 20 से 25 गांवों के लोग स्वास्थ्य सेवाओं के लिए इसी केंद्र पर निर्भर हैं। ऐसे में केंद्र की बदहाल स्थिति का असर बड़ी आबादी पर पड़ सकता है।
ग्रामीण नियमित रूप से डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मियों की उपलब्धता को लेकर भी सवाल उठाते रहे हैं। उनका कहना है कि समय पर स्वास्थ्यकर्मी उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में प्रसव जैसी गंभीर परिस्थितियों में महिलाओं और उनके परिजनों को अतिरिक्त परेशानी का सामना करना पड़ता है।
ग्रामीणों की मांग है कि स्वास्थ्य केंद्र के भवन की मरम्मत के साथ यहां पर्याप्त चिकित्सा सुविधाएं और स्वास्थ्यकर्मियों की नियमित उपलब्धता सुनिश्चित की जाए।
सरकारी दावों और जमीनी हकीकत में अंतर?
सरकार की ओर से ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने और सुरक्षित मातृत्व को बढ़ावा देने पर लगातार जोर दिया जाता है। लेकिन घुंघुटी उप स्वास्थ्य केंद्र की तस्वीर इन दावों की जमीनी स्थिति पर सवाल खड़े करती नजर आती है।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर किसी स्वास्थ्य केंद्र में प्रसव के लिए सुरक्षित और सूखी जगह तक उपलब्ध नहीं है, तो प्रसव पीड़ा से गुजर रही महिलाओं को वहां किस भरोसे पर पहुंचना चाहिए?
बारिश के दौरान जलभराव, टपकती छत और जर्जर भवन मरीजों की सुरक्षा के लिए भी चिंता का विषय हैं। खासतौर पर गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं के मामले में ऐसी लापरवाही के गंभीर परिणाम हो सकते हैं।
बीएमओ ने नहीं उठाया फोन
मामले को लेकर पाली बीएमओ पुट्टू लाल सागर से उनका पक्ष जानने के लिए संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया। अधिकारी का पक्ष सामने नहीं आने के कारण स्वास्थ्य विभाग की जवाबदेही को लेकर सवाल और गहरा गए हैं।
अब जरूरत इस बात की है कि संबंधित विभाग घुंघुटी उप स्वास्थ्य केंद्र की स्थिति का निरीक्षण करे और भवन की मरम्मत सहित जरूरी स्वास्थ्य सुविधाओं को तत्काल दुरुस्त करे। ग्रामीणों की नजर अब इस बात पर है कि इस घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन की ओर से क्या कार्रवाई की जाती है।
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