गन्ने से Ethanol पर रोक की तैयारी – चीनी कीमतें घटाने के लिए सरकार का बड़ा कदम

चीनी की बढ़ती कीमतों ने केंद्र सरकार की चिंता बढ़ा दी है और इसी के बीच सरकार एथेनॉल उत्पादन के लिए गन्ने के इस्तेमाल को सीमित करने पर विचार कर रही है। रिपोर्टों के मुताबिक, अक्टूबर 2026 से शुरू होने वाले नए शुगर सीजन में सरकार ऐसी नीति ला सकती है, जिससे ज्यादा गन्ना चीनी उत्पादन के लिए उपलब्ध रहे। पिछले एक महीने में भारत में चीनी की कीमतों में करीब 10% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है और सीमित आपूर्ति के कारण कीमतों पर दबाव बना हुआ है। त्योहारी सीजन में मिठाइयों और चीनी की मांग बढ़ने की संभावना को देखते हुए सरकार घरेलू बाजार में पर्याप्त स्टॉक बनाए रखने के विकल्पों पर काम कर रही है।

मामले की बड़ी वजह चीनी उत्पादन में आई संभावित कमी और गन्ने के एक हिस्से का एथेनॉल बनाने में इस्तेमाल होना है। मौजूदा सीजन में करीब 30 लाख मीट्रिक टन चीनी के बराबर मात्रा एथेनॉल उत्पादन की ओर डायवर्ट की गई है। सरकार का आकलन है कि यदि इस गन्ने को दोबारा चीनी उत्पादन की तरफ मोड़ा जाए तो बाजार में उपलब्धता बढ़ सकती है और कीमतों को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है। खासकर महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे प्रमुख चीनी उत्पादक राज्यों में कम बारिश से उत्पादन को लेकर चिंता बढ़ी है, जिससे अगले सीजन की शुरुआती सप्लाई भी प्रभावित होने की आशंका है।

सरकार के सामने हालांकि एथेनॉल ब्लेंडिंग लक्ष्य को बनाए रखने की चुनौती भी है। भारत ने पेट्रोल में 20% एथेनॉल ब्लेंडिंग का लक्ष्य रखा है और सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 2024-25 में ब्लेंडिंग 19.24% तक पहुंच चुकी थी। ऐसे में गन्ने से मिलने वाले एथेनॉल की जगह सरकार मक्का और चावल जैसे दूसरे फीडस्टॉक का इस्तेमाल बढ़ाने पर विचार कर सकती है, क्योंकि इनकी उपलब्धता फिलहाल पर्याप्त बताई जा रही है। संभावित नियमों में चीनी उत्पादन को प्राथमिकता देते हुए एथेनॉल के लिए मुख्य रूप से C-heavy molasses के इस्तेमाल की अनुमति देने का विकल्प भी सामने आया है, जबकि गन्ने के रस या B-heavy molasses के इस्तेमाल पर सीमाएं लग सकती हैं।

 

अगर सरकार ऐसा फैसला लेती है तो इसका असर सिर्फ चीनी की कीमतों पर नहीं, बल्कि चीनी मिलों, किसानों और एथेनॉल उद्योग पर भी पड़ेगा। हालांकि ऊंची चीनी कीमतों की स्थिति में मिलों के लिए चीनी बेचना एथेनॉल उत्पादन की तुलना में अधिक लाभदायक हो सकता है। दूसरी ओर, सरकार को किसानों के हित और एथेनॉल नीति के बीच संतुलन बनाना होगा। केंद्र ने 2026-27 सीजन के लिए गन्ने का FRP ₹365 प्रति क्विंटल तय किया है, जो पिछले सीजन से 2.81% अधिक है। नए एथेनॉल आवंटन और संबंधित नियमों पर अंतिम निर्णय आगामी सीजन से पहले लिया जाना है। 

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