
भारत की सांस्कृतिक विरासत और राष्ट्रीय अखंडता को संजोने में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) आज एक ऐसे वटवृक्ष के रूप में उभरा है, जिसकी छाया में जाति, पंथ और विभिन्न विचारधाराओं के भेद मिट रहे हैं। संघ न केवल हिंदुत्व की एकता का मार्ग प्रशस्त कर रहा है, बल्कि समाज में सद्भावना, सहयोग और अटूट भाईचारे की नई इबारत भी लिख रहा है।
योग और अनुशासन से गढ़ा जा रहा राष्ट्र का चरित्र
संघ की शाखाओं में होने वाले योग, व्यायाम और खेल केवल शारीरिक विकास का माध्यम नहीं हैं, बल्कि ये स्वयंसेवकों के भीतर अनुशासन और सामूहिकता की भावना का संचार करते हैं। प्रतिदिन लगने वाली इन शाखाओं के माध्यम से संघ समाज के हर वर्ग को एक सूत्र में पिरोने का कार्य कर रहा है। यहाँ न कोई ऊँचा है, न कोई नीचा; यहाँ केवल एक ही पहचान सर्वोपरि है—’स्वयंसेवक‘।
जातिवाद के अवरोध तोड़ती ‘हिंदुत्व एकता‘
संघ का मूल मंत्र समाज के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति को मुख्यधारा से जोड़ना है। विभिन्न जातियों और उप–जातियों में बंटे हिंदू समाज को एक विराट पहचान देने के लिए संघ निरंतर प्रयासरत है। सामाजिक समरसता के कार्यक्रमों के माध्यम से आरएसएस ने यह सिद्ध किया है कि जब बात राष्ट्र और संस्कृति की आती है, तो सभी विचारधाराएँ और जातियाँ एक स्वर में ‘भारत माता की जय‘ का घोष करती हैं।
“संघ का उद्देश्य केवल संगठन बनाना नहीं, बल्कि समाज को संगठित करना है। जब समाज में सद्भावना और सहयोग का भाव होगा, तभी राष्ट्र परम वैभव के शिखर पर पहुँचेगा।” — संघ के विचारकों का मत
सद्भावना और सेवा का संकल्प
आपदा के समय हो या सामान्य जनजीवन में, संघ के स्वयंसेवक ‘सेवा परमो धर्म:’ के ध्येय वाक्य को चरितार्थ करते नजर आते हैं। शिक्षा, स्वास्थ्य और ग्राम विकास के क्षेत्र में संघ द्वारा चलाए जा रहे सेवा प्रकल्पों ने समाज के भीतर प्रेम और विश्वास की जड़ों को गहरा किया है। यह संगठन आज एक ऐसे मंच के रूप में स्थापित हो चुका है, जहाँ आपसी सहयोग से ही सुनहरे भविष्य की कल्पना की जा रही है।
मुख्य आकर्षण: संघ की कार्यशैली
दैनिक शाखा: चरित्र निर्माण और एकता का जीवंत केंद्र।
● सामाजिक समरसता: ऊंच–नीच के भेदभाव को समाप्त कर ‘हिंदू भाव‘ को जागृत करना।
● बौद्धिक विमर्श: सांस्कृतिक राष्ट्रवाद और भारतीय मूल्यों के प्रति जागरूकता।
● विभिन्न आयाम: समाज के हर क्षेत्र (मजदूर, छात्र, किसान) में एकता का विस्तार।
निश्चित रूप से, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अपनी रीति–नीति और कार्यक्रमों के माध्यम से न केवल हिंदुत्व को सशक्त कर रहा है, बल्कि एक समरस और समृद्ध राष्ट्र के निर्माण की दिशा में अग्रणी भूमिका निभा रहा है।







