
इंदौर, 1 अक्टूबर 2026। कमजोर मानसून के बाद इंदौर में आने वाले दिनों में पेयजल संकट की चिंता बढ़ गई है। इस साल शहर में करीब 23 इंच बारिश हुई, जो सामान्य औसत से लगभग 14 इंच कम बताई गई है। कम बारिश का असर तालाबों, भूजल और बोरिंग पर दिखाई दे रहा है। स्थिति को देखते हुए नगर निगम ने अब घर-घर सर्वे शुरू किया है, ताकि शहर में पानी की वास्तविक जरूरत का आकलन किया जा सके।
तालाब नहीं भर पाए, भूजल स्तर भी गिरा
अमर उजाला की रिपोर्ट के मुताबिक, इंदौर के बिलावली समेत कई प्रमुख तालाब इस मानसून में अपनी क्षमता के अनुसार नहीं भर पाए। ग्रामीण क्षेत्रों में भूजल स्तर नीचे जाने से रबी फसल को लेकर भी चिंता बढ़ी है। कई इलाकों में बोरिंग का पानी कम होने या पूरी तरह खत्म होने की स्थिति सामने आई है।
रिपोर्ट के अनुसार, सितंबर में इंदौर में करीब 125 मिलीमीटर बारिश हुई, जो पिछले 10 वर्षों में सितंबर की सबसे कम बारिश बताई गई है। इस साल शहर में कुल बारिश करीब 590 मिलीमीटर दर्ज होने की जानकारी दी गई है।
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घर-घर जाकर पानी की जरूरत पूछ रहा निगम
जल संकट की आशंका को देखते हुए नगर निगम की टीमें घर-घर पहुंचकर जानकारी जुटा रही हैं। सर्वे में घर में रहने वाले सदस्यों की संख्या, किराएदारों की संख्या और रोजाना पानी की जरूरत से संबंधित जानकारी ली जा रही है।
अधिकारियों के अनुसार, इस सर्वे से यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि अलग-अलग इलाकों में पानी की कितनी आवश्यकता है। इसके आधार पर टैंकर और अन्य माध्यमों से पानी पहुंचाने की व्यवस्था के लिए आगे की योजना तैयार की जाएगी। कुछ क्षेत्रों में अभी से टैंकरों के जरिए पानी पहुंचाने की जरूरत पड़ रही है।
कमजोर मानसून ने बढ़ाई चिंता
इंदौर में कम बारिश के पीछे कई मौसमी कारण बताए गए हैं। रिपोर्ट में अल नीनो के प्रभाव, बंगाल की खाड़ी से आने वाले मौसम प्रणालियों के मालवा तक कमजोर पड़ने और अरब सागर से पर्याप्त नमी नहीं मिलने जैसे कारणों का उल्लेख है। राष्ट्रीय स्तर पर भी 2026 का मानसून सामान्य से कम रहा। भारत में जून से सितंबर के बीच कुल बारिश सामान्य से करीब 12.6 फीसदी कम दर्ज हुई।
अब अक्टूबर में होने वाली बारिश इंदौर के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। यदि बारिश से जलस्रोतों को पर्याप्त भराव नहीं मिलता है, तो आने वाले महीनों में पेयजल व्यवस्था पर दबाव बढ़ सकता है।
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