
भोपाल | मध्य प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के बाद चेहरे तो बदले, लेकिन क्या भ्रष्टाचार का चरित्र बदला? यह सवाल आज प्रदेश के हर उस युवा, किसान और आम नागरिक के मन में है जो पिछले कुछ महीनों में एक के बाद एक सामने आए महा-घोटालों को देख रहा है। डॉ. मोहन यादव की सरकार में ‘जीरो टॉलरेंस‘ का नारा केवल कागजों और होर्डिंग्स तक सिमट कर रह गया है।
1. पीएचई (PHE) घोटाला: प्यासे गले और पानी पी गया करप्शन का जिन्न
‘हर घर नल, हर घर जल‘ का दावा करने वाला लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (PHE) आज खुद भ्रष्टाचार के कीचड़ में डूबा है। 500 से 1000 करोड़ रुपये का यह घोटाला प्रदेश की जनता के साथ सीधा विश्वासघात है। ग्वालियर-चंबल और बुंदेलखंड जैसे सूखे इलाकों में पाइपलाइन बिछी नहीं, टंकियां बनी नहीं, लेकिन फाइलों में करोड़ों का भुगतान ‘डकार‘ लिया गया। जनता आज भी कुओं और टैंकरों के पीछे भाग रही है, जबकि ठेकेदार और अफसर जनता की गाढ़ी कमाई की मलाई काट रहे हैं।
2. नर्सिंग कॉलेज घोटाला: शिक्षा का मंदिर या ‘फर्जीवाड़े की फैक्ट्रियां‘?
डॉ. मोहन यादव के कार्यकाल में नर्सिंग कॉलेज घोटाले ने जो मोड़ लिया, उसने पूरे देश को शर्मसार कर दिया है। जिन कॉलेजों के पास अपनी बिल्डिंग नहीं, लैब नहीं, उन्हें ‘फिट‘ बता दिया गया। हद तो तब हो गई जब जाँच करने वाली CBI के अधिकारी ही रिश्वत लेते पकड़े गए। यह सिर्फ पैसों का घोटाला नहीं है, बल्कि लाखों छात्रों के भविष्य और प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था के साथ हुआ ‘क्रिमिनल मर्डर‘ है।
3. पटवारी भर्ती: ‘व्यापम-2′ की आहट, काबिलियत पर फिर पड़ा डाका
युवाओं को उम्मीद थी कि नई सरकार में नौकरियां पारदर्शिता से मिलेंगी, लेकिन पटवारी भर्ती परीक्षा ने उन सपनों पर पानी फेर दिया। एक ही कॉलेज से टॉपर्स की बाढ़ आना और हस्ताक्षरों में विसंगति मिलना साफ करता है कि सिस्टम में ‘दीमक‘ अभी भी सक्रिय है। क्लीन चिट के नाम पर सच को दबाने की कोशिशें युवाओं के आक्रोश को और भड़का रही हैं।
4. कारम डैम: 300 करोड़ की लागत और भ्रष्टाचार की ‘दरार‘
धार का कारम डैम भ्रष्टाचार का जीवंत प्रमाण है। 300 करोड़ रुपये स्वाहा करने के बाद भी बांध की दीवारें पहली बारिश तक नहीं झेल पाईं। ब्लैकलिस्टेड कंपनियों को ठेका देना और घटिया निर्माण सामग्री का उपयोग करना बताता है कि अफसरों के लिए इंसानी जान की कीमत चंद रुपयों से ज्यादा कुछ नहीं है।
प्रमुख घोटालों का कच्चा-चिट्ठा
घोटाला / विभाग | मुख्य आरोप | अनुमानित राशि | वर्तमान स्थिति |
PHE (नल-जल) | फर्जी बिलिंग और अधूरा काम | ₹500 – ₹1000 करोड़ | जांच जारी |
नौकरी (पटवारी) | पेपर लीक और धांधली | हजारों युवाओं का भविष्य | विवादों के घेरे में |
नर्सिंग कॉलेज | फर्जी मान्यता और रिश्वतखोरी | करोड़ों का खेल | मामला लंबित |
कारम डैम | घटिया निर्माण | ₹300 करोड़ | निर्माण पर सवालिया निशान |







