मप्र एमएसएमई व सेडमैप में मिलीभगत का सिंडिकेट? मंडियों के गार्डों का वेतन डकारने वाली ‘आरबी एसोसिएट्स’ पर ईडी की मेहरबानी क्यों?

भोपाल (ब्रांडवाणी समाचार) | 

मध्य प्रदेश को औद्योगिक विकास और रोजगार सृजन की नई दिशा देने का दावा करने वाला एमएसएमई विभाग (सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम) इन दिनों गंभीर प्रशासनिक और नीतिगत सवालों के घेरे में है। विभाग में जमीन आवंटन की कछुआ चाल से निवेशक पहले ही हताश हैं, वहीं इसके अधीन कार्यरत सबसे प्रतिष्ठित संस्था ‘उद्यमिता विकास केंद्र, मध्य प्रदेश‘ सेडमैप CEDMAP अब बड़े भ्रष्टाचार और अनियमितताओं की प्रयोगशाला बनती नजर आ रही है। डर और दबाव से दूर रहकर सच्चाई सामने लाने वाली निर्भीक पत्रकारिता की पहचान के साथ, ‘ब्रांडवाणी समाचार‘ सेडमैप के गलियारों में चल रहे उस खेल का पर्दाफाश कर रहा है, जिसमें आउटसोर्स कर्मचारियों के पसीने की कमाई और नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।

कार्यकाल के बचे 8-9 माह और सेडमैप में ‘बड़ा खेल‘

विश्वसनीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, सेडमैप के नवनियुक्त कार्यपालन संचालक (ED) राजेंद्र सिंह और मैनपॉवर सप्लायर फर्म ‘आरबी एसोसिएट्स‘ के बीच का पुराना तालमेल अब खुलकर सामने आ रहा है। चर्चा है कि ईडी पद पर राजेंद्र सिंह का कार्यकाल अब मात्र 8 से 9 महीने ही शेष रह गया है। आरोप हैं कि अपनी सेवानिवृत्ति या पदमुक्ति से पूर्व, वे सेडमैप के आउटसोर्सिंग तंत्र को एक ही कंपनी के हवाले करने की जल्दबाजी में हैं। सवाल उठता है कि सेडमैप, जो कि दशकों से नियमों और पारदर्शिता से चलने वाली विश्वसनीय संस्था रही है, उसे किसी एक चहेती कंपनी का चारागाह क्यों बनने दिया जा रहा है?

निलंबित अधिकारी की मध्यस्थता और करोड़ों की कथित ‘डील’ ?

सूत्रों का दावा है कि अन्य सभी पंजीकृत और सक्षम एजेंसियों से काम धीरे-धीरे छीनकर ‘आरबी एसोसिएट्स‘ की झोली में डालने का ताना-बाना बुना जा चुका है। इस कथित सिंडिकेट और सौदेबाजी में मुख्य मध्यस्थता सेडमैप से पहले से ही निलंबित अधिकारी दिनेश खरे द्वारा कराए जाने की गंभीर चर्चाएं हैं। आरोप है कि सेडमैप का समूचा मैनपॉवर ठेका आरबी एसोसिएट्स को सौंपने के एवज में ईडी स्तर पर एक बहुत बड़ी राशि की पेशकश और अंदरूनी तालमेल किया गया है। यही कारण है कि नए पारदर्शी एम्पैनलमेंट की फाइलों को दबाकर रखा गया है और अन्य योग्य कंपनियों के लिए सेडमैप के दरवाजे बंद कर दिए गए हैं।

सेडमैप दफ्तर बना आरबी एसोसिएट्स का ‘अड्डा‘

स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जब से राजेंद्र सिंह (ED) ने पदभार संभाला है, तब से आरबी एसोसिएट्स का पूरा कुनबा दिन भर सेडमैप के अरेरा हिल्स स्थित मुख्यालय में डेरा जमाए रहता है। आम फरियादी और नियमों से काम करने वाली अन्य एजेंसियों के प्रतिनिधि जहां अधिकारियों के कमरों के चक्कर काटते रहते हैं, वहीं इस विवादित फर्म के सिंडिकेट को विशेष तवज्जो दी जा रही है।

मंडियों के सुरक्षा गार्डों के शोषण और करोड़ों के गबन का इतिहास

आरबी एसोसिएट्स की कार्यशैली पर नजर डालें तो इसका रिकॉर्ड बेहद दागदार रहा है। मध्य प्रदेश की कृषि उपज मंडियों में सुरक्षा गार्डों की आपूर्ति के नाम पर यह कंपनी भारी शोषण के आरोपों से घिरी रही है:

· वेतन और बोनस हड़पने का खेल: सूत्रों के अनुसार आरोप है कि मंडियों के गरीब सुरक्षा गार्डों को न तो समय पर वेतन दिया जाता है और न ही नियमानुसार मिलने वाले बोनस का भुगतान किया जाता है।

· रिलीवर का पैसा दबाना: कर्मचारियों की छुट्टी के दौरान लगने वाले रिलीवर मद की पूरी राशि डकार ली जाती है।

· हर महीने 2 से 3 करोड़ का कथित वारा-न्यारा: सूत्रों का स्पष्ट आरोप है कि मंडियों से शासन द्वारा जारी की जाने वाली भारी-भरकम राशि और सुरक्षा गार्डों के खातों में जमा वास्तविक भुगतान की यदि निष्पक्ष जांच और वित्तीय ऑडिट कराई जाए, तो हर महीने 2 से 3 करोड़ रुपये के गबन का खुलासा होगा।

· सेडमैप कर्मचारियों का भी वेतन अटका: इस कंपनी की लापरवाही का आलम यह है कि सेडमैप के जरिए लगाए गए आउटसोर्स कर्मचारियों को भी समय पर वेतन नहीं मिल रहा है, जिससे सैकड़ों परिवार भुखमरी की कगार पर हैं।

ब्रांडवाणी समाचार के तीखे सवाल:

1. जिस एजेंसी पर कर्मचारियों के करोड़ों रुपये के शोषण और गबन के गंभीर आरोप हैं, उसे सेडमैप का पूरा काम सौंपने की इतनी बेताबी क्यों दिखाई जा रही है?

2. क्या एक निलंबित अधिकारी के इशारों पर सेडमैप जैसी महत्वपूर्ण सरकारी संस्था के नियम और नीतियां तय की जा रही हैं?

3. क्या मात्र कुछ महीनों के बचे कार्यकाल में भारी व्यक्तिगत लाभ कमाने के चक्कर में सार्वजनिक व्यवस्था और पारदर्शी प्रतिस्पर्धा की बलि दी जा रही है?

4. क्या एमएसएमई विभाग के उच्चाधिकारी और लोकायुक्त/ईओडब्ल्यू (EOW) इस पूरे गठजोड़ का संज्ञान लेकर राजेंद्र सिंह, दिनेश खरे और आरबी एसोसिएट्स के वित्तीय लेन-देन की उच्च स्तरीय जांच कराएंगे?

मध्य प्रदेश शासन की पारदर्शी नीतियों की साख बचाने के लिए आवश्यक है कि सेडमैप में चल रही इस मनमानी पर तत्काल रोक लगाई जाए। आरबी एसोसिएट्स जैसी विवादित कंपनी को उपकृत करने के प्रयास को तुरंत निरस्त कर, खुली और पारदर्शी एम्पैनलमेंट प्रक्रिया बहाल की जाए और कार्यपालन संचालक की संदिग्ध कार्यप्रणाली पर कठोर प्रशासनिक कार्रवाई सुनिश्चित हो।

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