
रतलाम/ नाहरू ख़ान: सोशल मीडिया पर किसी परिचित, अधिकारी, जनप्रतिनिधि या सेलिब्रिटी के नाम से आने वाला मैसेज आपको भारी पड़ सकता है। साइबर अपराधी अब लोगों की पहचान और तस्वीरों का दुरुपयोग कर फर्जी WhatsApp, Facebook और Instagram प्रोफाइल बना रहे हैं। इसके बाद परिचितों और अन्य लोगों को मैसेज भेजकर आर्थिक मदद के नाम पर पैसे की मांग की जा रही है।
साइबर ठगी के बढ़ते मामलों को देखते हुए रतलाम पुलिस की साइबर सेल ने आमजन के लिए एडवाइजरी जारी की है। पुलिस अधीक्षक रतलाम अमित कुमार के निर्देशन और वरिष्ठ अधिकारियों के मार्गदर्शन में लोगों से सोशल मीडिया पर मिलने वाले संदिग्ध मैसेज और आर्थिक सहायता के अनुरोध पर बिना सत्यापन भरोसा नहीं करने की अपील की गई है।
अधिकारी और सेलिब्रिटी के नाम से बना रहे फर्जी अकाउंट
साइबर अपराधी प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों, सेलिब्रिटीज और अन्य प्रतिष्ठित लोगों की सोशल मीडिया पर उपलब्ध तस्वीरों और जानकारियों का इस्तेमाल कर फर्जी प्रोफाइल तैयार करते हैं। इसके बाद वे संबंधित व्यक्ति के परिचितों, कर्मचारियों, दोस्तों या अन्य लोगों को मैसेज भेजकर खुद को वही व्यक्ति बताते हैं।
ठग पहले बातचीत के जरिए सामने वाले का विश्वास जीतते हैं और इसके बाद अलग-अलग बहाने बनाकर पैसों की मांग करते हैं।
इन बहानों से मांगे जा सकते हैं पैसे
पुलिस के मुताबिक साइबर ठग तत्काल आर्थिक मदद की जरूरत बताकर पैसे मांग सकते हैं। इसके अलावा किसी बैंक खाते में राशि ट्रांसफर करने, गिफ्ट या वाउचर खरीदने, इमरजेंसी का हवाला देने अथवा ऑनलाइन भुगतान के लिए लिंक भेजने जैसे तरीके अपनाए जा सकते हैं।
कई मामलों में ठग QR Code या UPI के जरिए भुगतान करने के लिए भी दबाव बनाते हैं। प्रोफाइल को असली दिखाने के लिए वे संबंधित व्यक्ति का नाम, फोटो, पदनाम और सार्वजनिक रूप से उपलब्ध व्यक्तिगत जानकारी तक इस्तेमाल कर सकते हैं।
सिर्फ फोटो देखकर न करें भरोसा
रतलाम पुलिस ने स्पष्ट किया है कि सोशल मीडिया प्रोफाइल पर लगी तस्वीर और लिखा हुआ नाम किसी व्यक्ति की वास्तविक पहचान का प्रमाण नहीं है। सार्वजनिक रूप से उपलब्ध तस्वीरों को डाउनलोड कर कोई भी व्यक्ति उनके नाम से फर्जी अकाउंट बना सकता है।
अगर किसी परिचित या वरिष्ठ अधिकारी के नाम से अचानक पैसे मांगने वाला मैसेज आए तो तुरंत रकम ट्रांसफर करने के बजाय पहले पहचान की पुष्टि करें।
फर्जी प्रोफाइल की ऐसे करें जांच
पुलिस ने लोगों से सोशल मीडिया अकाउंट का यूजरनेम, मोबाइल नंबर और पुरानी गतिविधियां जांचने की अपील की है। अचानक आए मैसेज और पैसों की मांग को संदिग्ध मानें। अगर कोई परिचित व्यक्ति पैसे मांगता है तो उसके पुराने और पहले से ज्ञात मोबाइल नंबर पर खुद कॉल करके पुष्टि करें।
इसके अलावा अनजान लिंक पर क्लिक न करें और किसी संदिग्ध QR Code को स्कैन करने से बचें। OTP, UPI PIN, ATM PIN, CVV और इंटरनेट बैंकिंग पासवर्ड किसी के साथ साझा न करें। सोशल मीडिया पर निजी और वित्तीय जानकारी सार्वजनिक करने से भी बचने की सलाह दी गई है।
आपके नाम से फर्जी प्रोफाइल बने तो क्या करें?
अगर किसी व्यक्ति के नाम और फोटो का इस्तेमाल कर फर्जी प्रोफाइल बनाई गई है तो उसे संबंधित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर Report/Impersonation के रूप में रिपोर्ट करें। फर्जी अकाउंट का URL, यूजरनेम, मोबाइल नंबर, चैट और स्क्रीनशॉट सुरक्षित रखें।
साथ ही अपने परिचितों को तुरंत जानकारी दें कि संबंधित प्रोफाइल फर्जी है। यदि उस अकाउंट से लोगों से पैसे मांगे जा रहे हैं तो संभावित पीड़ितों को भी तत्काल सावधान करें। गंभीर मामले में पुलिस थाने या साइबर सेल में शिकायत करते हुए उपलब्ध डिजिटल साक्ष्य सौंपें।
ठगी हो जाए तो 1930 पर करें कॉल
अगर साइबर ठगी के जरिए पैसे ट्रांसफर हो चुके हैं तो कार्रवाई में बिल्कुल देरी न करें। तुरंत साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें। इसके साथ ही संबंधित बैंक या वित्तीय संस्था को भी तत्काल सूचना दें, ताकि लेन-देन को रोकने या राशि सुरक्षित कराने के लिए आवश्यक कार्रवाई की जा सके।
पुलिस ने सलाह दी है कि चैट, मोबाइल नंबर, UPI ID, बैंक खाता विवरण, ट्रांजेक्शन डिटेल और स्क्रीनशॉट जैसे डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखें।
रतलाम साइबर सेल की अपील
रतलाम साइबर सेल ने आमजन से अपील की है कि किसी अधिकारी, जनप्रतिनिधि, सेलिब्रिटी या परिचित व्यक्ति के नाम से अचानक आर्थिक मदद मांगने वाला संदेश मिलने पर बिना पुष्टि के पैसे न भेजें। पहचान की एक छोटी-सी पुष्टि साइबर ठगी से होने वाले बड़े आर्थिक नुकसान से बचा सकती है।
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