
उज्जैन में डोल ग्यारस के अवसर पर बैरवा समाज का 105वां फूलडोल चल समारोह निकाला गया। अखाड़ों के शौर्य प्रदर्शन, धार्मिक झांकियों और सामाजिक संदेशों ने लोगों का ध्यान खींचा। समारोह में सिंहस्थ की तैयारियों की झलक भी दिखाई गई।
अखाड़ों के शौर्य प्रदर्शन ने खींचा ध्यान
23 सितंबर 2026 को डोल ग्यारस के अवसर पर उज्जैन में बैरवा समाज का 105वां फूलडोल चल समारोह आयोजित किया गया। समारोह की शुरुआत किशनपुरा स्थित बड़े मंदिर से हुई। यहां से निकली शोभायात्रा में विभिन्न अखाड़ों के उस्तादों और युवा कलाकारों ने शौर्य प्रदर्शन किया।
कलाकारों के करतबों के दौरान मार्ग पर मौजूद लोगों ने तालियों और जयकारों के साथ उत्साह बढ़ाया। 105 साल पुरानी इस परंपरा में धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक सहभागिता का भी नजारा देखने को मिला। रिपोर्ट के अनुसार, समाज की महिलाओं और उपासकों ने निर्जला व्रत रखकर सुख-समृद्धि की कामना की।
खड़े हनुमान और कृष्ण लीला की झांकियां रहीं आकर्षण
फूलडोल समारोह में भगवान खड़े हनुमान की झांकी प्रमुख आकर्षण रही। इसके अलावा भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप, यशोदा संग मटकी फोड़ते कान्हा, पूतना वध और पालना झूलते बाल मुकुंद की झांकियां भी शामिल रहीं। बाबा महाकाल की भस्म आरती को भी झांकी के माध्यम से प्रस्तुत किया गया।
शोभायात्रा किशनपुरा से शुरू होकर तीन बत्ती चौराहा, टावर चौक, चामुंडा चौराहा, देवास गेट, मालीपुरा, दौलतगंज, कंठाल चौराहा, गोपाल मंदिर और निजातपुरा होते हुए अंकपात स्थित पुरुषोत्तम सागर पहुंची, जहां इसका समापन हुआ।
झांकियों में दिखी सिंहस्थ की तैयारियों की झलक
इस बार समारोह में धार्मिक झांकियों के साथ उज्जैन में सिंहस्थ की तैयारियों और विकास कार्यों को भी दर्शाया गया। झांकियों में 29 किलोमीटर लंबे घाट, एलिवेटेड ब्रिज और अमृत कलश की प्रतिकृति को प्रदर्शित किया गया।
इसके अलावा नशा मुक्ति, दहेज प्रथा के उन्मूलन और सामाजिक भाईचारे जैसे संदेश भी झांकियों के जरिए दिए गए। समारोह के दौरान अखाड़ा प्रमुखों का स्वागत और सम्मान भी किया गया। उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले अखाड़ों और झांकियों को पुरस्कृत किया गया।
उज्जैन का 105वां फूलडोल चल समारोह धार्मिक आस्था, शौर्य प्रदर्शन और सामाजिक संदेशों का संगम बना। पुरानी परंपरा के साथ सिंहस्थ की तैयारियों और सामाजिक जागरूकता को भी झांकियों में जगह दी गई।
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