उज्जैन की शाही मस्जिद पर हाई कोर्ट से नहीं मिली राहत, सड़क चौड़ीकरण की कार्रवाई पर रोक की मांग खारिज

उज्जैन की शाही मस्जिद के सड़क चौड़ीकरण की कार्रवाई को रोकने की मांग वाली याचिका पर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने राहत नहीं दी है। मामला सिंहस्थ-2028 को देखते हुए प्रस्तावित सड़क चौड़ीकरण से जुड़ा है। इससे पहले एकलपीठ भी मस्जिद पक्ष की याचिका खारिज कर चुकी थी। 

मस्जिद के हिस्से को हटाने की कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग

सिंहस्थ-2028 की तैयारियों के बीच उज्जैन की शाही मस्जिद को लेकर चल रहा विवाद सोमवार को एक बार फिर हाई कोर्ट पहुंचा। सड़क चौड़ीकरण की जद में आ रहे मस्जिद के हिस्से को हटाने की कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग को लेकर मस्जिद पक्ष की ओर से दायर अपील पर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने सुनवाई की। अदालत ने मस्जिद पक्ष को कार्रवाई पर रोक के रूप में राहत नहीं दी। विस्तृत आदेश बाद में जारी किए जाने की बात सामने आई है। 

मामला उज्जैन के छत्री चौक क्षेत्र में स्थित शाही मस्जिद से जुड़ा है। उज्जैन में सिंहस्थ-2028 और बड़े धार्मिक आयोजनों को देखते हुए मार्ग चौड़ीकरण की योजना पर काम चल रहा है। मास्टर प्लान-2035 के तहत कंठाल चौराहा से गोपाल मंदिर तक करीब 15 मीटर चौड़ा मार्ग प्रस्तावित है। इसी सड़क चौड़ीकरण की जद में शाही मस्जिद का कुछ हिस्सा आ रहा है। 

पहले एकलपीठ में पहुंचा था मामला

मस्जिद प्रबंधन की ओर से नगर निगम की ओर से जारी नोटिसों को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट में याचिका दायर की गई थी। याचिका में मस्जिद के हिस्से को हटाने की कार्रवाई पर रोक लगाने और संबंधित नोटिसों को निरस्त करने की मांग की गई थी।

9 सितंबर को हाई कोर्ट की एकलपीठ ने इस मामले में याचिकाओं पर सुनवाई की थी। अदालत के आदेश में दर्ज है कि याचिकाकर्ताओं ने मस्जिद के प्रार्थना कक्ष, 120 फीट ऊंची मीनार और सामने स्थित धार्मिक हिस्से को सड़क चौड़ीकरण के लिए हटाए जाने पर आपत्ति जताई थी। याचिकाकर्ताओं ने इसे वक्फ संपत्ति बताते हुए संवैधानिक अधिकारों का भी हवाला दिया था। 

एकलपीठ के आदेश के बाद मस्जिद प्रबंधन की ओर से मामले को युगलपीठ के सामने चुनौती दी गई। सोमवार को इसी अपील पर सुनवाई हुई।

सड़क चौड़ीकरण के लिए हटाया जा रहा हिस्सा

प्रशासन और नगर निगम की कार्रवाई सड़क चौड़ीकरण की योजना से जुड़ी है। इससे पहले सामने आए प्रशासनिक पक्ष के अनुसार उज्जैन शहर में सड़क चौड़ीकरण की जद में आने वाले धार्मिक और अन्य निर्माणों को हटाने की कार्रवाई की जा रही है। हाई कोर्ट के रिकॉर्ड में भी नगर निगम की ओर से यह बताया गया है कि इसी मार्ग पर पहले करीब 10 मंदिरों और एक मस्जिद के हिस्से हटाए जा चुके हैं। इसके अलावा शहर में करीब 80 धार्मिक स्थलों से जुड़े निर्माणों पर कार्रवाई किए जाने की जानकारी अदालत के समक्ष रखी गई थी। 

मस्जिद पक्ष ने दूसरी ओर दावा किया है कि शाही मस्जिद पुरानी धार्मिक संरचना है और इसके ऐतिहासिक महत्व से जुड़े दस्तावेज मौजूद हैं। पक्ष की ओर से यह भी तर्क दिया गया कि मस्जिद के जिस हिस्से को हटाया जा रहा है, उससे पूरी संरचना प्रभावित हो सकती है। 

कार्रवाई के दौरान तनाव, पुलिस ने संभाला मोर्चा

हाई कोर्ट में सुनवाई के बीच सोमवार को शाही मस्जिद के बाधक हिस्से को हटाने की कार्रवाई भी चर्चा में रही। स्थानीय रिपोर्ट के अनुसार कार्रवाई के दौरान कुछ लोगों ने हंगामा और पथराव किया, जिसके बाद पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित किया। पुलिस ने आंसू गैस के गोले भी छोड़े। प्रशासन की ओर से लोगों से अफवाहों पर ध्यान नहीं देने और शांति बनाए रखने की अपील की गई। 

उज्जैन कलेक्टर रोशन सिंह के अनुसार छत्री चौक पर शाही मस्जिद का हिस्सा समुदाय की ओर से स्वयं हटाया जा रहा था। प्रशासन ने शहर में शांति व्यवस्था बनाए रखने पर जोर दिया। 

अब आगे क्या?

हाई कोर्ट से सोमवार को कार्रवाई पर रोक नहीं मिलने के बाद मामले में आगे की स्थिति विस्तृत आदेश और प्रशासनिक कार्रवाई पर निर्भर करेगी। फिलहाल विवाद का केंद्र सड़क चौड़ीकरण और मस्जिद के उस हिस्से को हटाने की कार्रवाई है, जिसे प्रशासन प्रस्तावित मार्ग के लिए बाधक मान रहा है।

सिंहस्थ-2028 से पहले उज्जैन में सड़क, यातायात और बुनियादी ढांचे से जुड़े कई काम चल रहे हैं। शाही मस्जिद का मामला इसी विकास योजना के बीच धार्मिक स्थल और सड़क चौड़ीकरण से जुड़े कानूनी विवाद के रूप में सामने आया है। अदालत में दोनों पक्षों की दलीलें दर्ज हैं और आगे की स्थिति विस्तृत न्यायिक आदेश तथा प्रशासनिक कदमों से स्पष्ट होगी।

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Manisha Gupta

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