
दौर शहर ने एक बार फिर मानवता की मिसाल देखी, जब हाईकोर्ट एडवोकेट अभिजीता राठौर ने अपने जीवन के अंतिम क्षणों में आठ लोगों को नई जिंदगी देने का अमर कार्य किया। 38 वर्षीय अभिजीता को ब्रेन हेमरेज के बाद अस्पताल में भर्ती किया गया था, जहां डॉक्टरों ने उन्हें ब्रेन डेड घोषित किया। इसके बाद उनके पति अभिषेक राठौर ने एक साहसिक और भावनात्मक निर्णय लेते हुए उनकी किडनी, लिवर, आंखें और त्वचा सहित कई अंगों को दान करने की सहमति दी।
इस अंगदान के लिए इंदौर में 65वां ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया, जिससे अंगों को समय पर अलग-अलग अस्पतालों तक पहुंचाया जा सका। अभिजीता के अंगों से आठ मरीजों को नया जीवन मिला, जिनमें से कुछ गंभीर रूप से बीमार थे और वर्षों से ट्रांसप्लांट की प्रतीक्षा कर रहे थे। यह कार्य न केवल चिकित्सा दृष्टि से महत्वपूर्ण था, बल्कि समाज में अंगदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने वाला भी साबित हुआ।
अंतिम विदाई के समय अभिषेक राठौर ने अपनी पत्नी को मंगलसूत्र पहनाकर विदा किया, जो एक भावनात्मक और सांस्कृतिक प्रतीक था — यह संदेश देता है कि उनका रिश्ता जीवन के पार भी कायम रहेगा। अभिजीता की मां और परिवार ने भी इस निर्णय का समर्थन किया, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि यह केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि पूरे परिवार का मानवीय संकल्प था।
अभिजीता राठौर पेशे से वकील थीं और सामाजिक कार्यों में भी सक्रिय थीं। उनके जीवन का यह अंतिम निर्णय उन्हें समाज में अमर बना गया। इंदौर के नागरिकों, चिकित्सा संस्थानों और प्रशासन ने इस कार्य की सराहना की और इसे मानवता की सर्वोच्च सेवा बताया।

