
अब मोबाइल यूज़र्स को अनजान नंबरों से आने वाली कॉल्स से परेशान होने की ज़रूरत नहीं है। भारत सरकार और टेलीकॉम कंपनियों की साझेदारी में एक नई तकनीकी पहल की जा रही है, जिससे कॉल करने वाले की पहचान (Caller ID) अब खुद-ब-खुद स्क्रीन पर दिखाई देगी, भले ही वह नंबर आपके कॉन्टैक्ट लिस्ट में न हो। इस सुविधा के लागू होने के बाद स्पैम कॉल्स, फ्रॉड और साइबर ठगी के मामलों में भारी कमी आने की उम्मीद जताई जा रही है।
इस तकनीक को सीएनएपी (Calling Name Presentation) कहा जा रहा है, जिसे ट्रायल के तौर पर कुछ टेलीकॉम कंपनियों ने शुरू कर दिया है। यह फीचर ट्रूकॉलर जैसी थर्ड पार्टी ऐप्स की तरह काम करेगा, लेकिन यह नेटवर्क लेवल पर इंटीग्रेटेड होगा, जिससे यूज़र को किसी अतिरिक्त ऐप की ज़रूरत नहीं पड़ेगी। कॉलर की KYC आधारित जानकारी सीधे स्क्रीन पर फ्लैश होगी, जिससे यूज़र तय कर सकेगा कि कॉल उठानी है या नहीं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम डिजिटल सुरक्षा और यूज़र अनुभव दोनों के लिहाज से बेहद अहम है। खासकर बुजुर्गों और ग्रामीण इलाकों के लोगों को इससे काफी राहत मिलेगी, जो अक्सर फर्जी कॉल्स और OTP फ्रॉड का शिकार बनते हैं। सरकार का उद्देश्य है कि डिजिटल इंडिया मिशन के तहत संचार को सुरक्षित और पारदर्शी बनाया जाए, ताकि आम नागरिकों का भरोसा तकनीक पर और मजबूत हो।

