
मध्य प्रदेश के एक ग्रामीण इलाके में अवैध शराब की बिक्री के खिलाफ महिलाएं सड़कों पर उतर आईं, और उन्होंने प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग की। प्रदर्शन कर रही महिलाओं ने बताया कि शाम ढलते ही गांव की गलियों में निकलना मुश्किल हो जाता है। नाबालिग से लेकर बुजुर्ग तक शराब के नशे में उत्पात मचाते हैं, जिससे महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा खतरे में पड़ गई है।
महिलाओं ने हाथों में तख्तियां और बैनर लेकर नारेबाजी की—“शराब बंद करो”, “गांव बचाओ”, “बेटियों को सुरक्षित रखो”—और ग्राम पंचायत कार्यालय के सामने धरना दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि गांव में कई जगहों पर खुलेआम शराब बेची जा रही है, और स्थानीय पुलिस की मिलीभगत से यह धंधा फल-फूल रहा है। कई महिलाओं ने बताया कि घरेलू हिंसा और आर्थिक तंगी का मुख्य कारण यही शराब है।
प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन को चेतावनी दी कि यदि एक सप्ताह के भीतर अवैध शराब बिक्री बंद नहीं हुई, तो वे जिला मुख्यालय पर बड़ा आंदोलन करेंगी। इस बीच, पुलिस और आबकारी विभाग ने कुछ दुकानों पर छापेमारी की है और कुछ लोगों को हिरासत में लिया गया है, लेकिन महिलाएं इसे प्रतीकात्मक कार्रवाई मान रही हैं।
यह विरोध न केवल सामाजिक जागरूकता का प्रतीक है, बल्कि ग्रामीण महिलाओं की हिम्मत और नेतृत्व क्षमता को भी दर्शाता है, जो अब अपने अधिकारों और सुरक्षा के लिए खुलकर आवाज उठा रही हैं। प्रशासन के लिए यह एक स्पष्ट संदेश है कि शराब माफिया के खिलाफ ठोस कार्रवाई अब टालने योग्य नहीं रही।

