
मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर, जो अपने स्वादिष्ट व्यंजनों और स्वच्छता के लिए जानी जाती है, अब एक गंभीर खाद्य सुरक्षा संकट के केंद्र में है। 30 अक्टूबर 2025 को खाद्य विभाग की टीम ने इंदौर के पालदा क्षेत्र में स्थित एक फैक्ट्री पर छापा मारकर 3400 किलोग्राम मिलावटी घी जब्त किया। प्रारंभिक जांच में यह पाया गया कि इस घी में वनस्पति तेल, कृत्रिम एसेंस और रसायनों की मिलावट की गई थी, जिसे असली देसी घी बताकर बाजार में बेचा जा रहा था।
इस छापेमारी के दौरान फैक्ट्री से घी बनाने की मशीनें, केमिकल मिक्सिंग यूनिट और पैकेजिंग सामग्री भी जब्त की गई। अधिकारियों के अनुसार, यह फैक्ट्री लंबे समय से मुनाफाखोरी के उद्देश्य से नकली घी का उत्पादन कर रही थी। शिकायत मिलने के बाद कलेक्टर शिवम वर्मा के निर्देश पर खाद्य सुरक्षा अधिकारियों ने यह कार्रवाई की। पहले लिए गए सैंपलों की जांच में मिलावट की पुष्टि होने के बाद यह छापा मारा गया।
यह मामला न केवल उपभोक्ताओं की सेहत के साथ खिलवाड़ है, बल्कि खाद्य सुरक्षा कानूनों की धज्जियां उड़ाने का भी उदाहरण है। नकली घी में प्रयुक्त रसायन लीवर, किडनी और पाचन तंत्र को गंभीर नुकसान पहुंचा सकते हैं, विशेषकर बच्चों और बुजुर्गों के लिए यह अत्यंत खतरनाक है। इंदौर जैसे शहर में, जहां स्वच्छता को लेकर कई बार राष्ट्रीय स्तर पर सराहना हुई है, वहां इस तरह की घटना प्रशासनिक निगरानी की कमजोरी को उजागर करती है।

