
उज्जैन शहर में आवारा कुत्तों का आतंक एक बार फिर सामने आया है। ताजा जानकारी के मुताबिक, बीते 24 घंटों के अंदर अलग-अलग इलाकों में 5 साल की एक मासूम बच्ची सहित करीब 11 लोगों को कुत्तों ने काट लिया। लगातार हो रही ऐसी घटनाओं से लोगों में डर का माहौल बना हुआ है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि आवारा कुत्तों की संख्या तेजी से बढ़ गई है और देर शाम या सुबह के समय बाहर निकलना जोखिमभरा हो गया है। शहर के कई मोहल्लों में झुंड के रूप में घूम रहे ये कुत्ते राहगीरों, बुजुर्गों और स्कूल जाते बच्चों पर अचानक हमला कर देते हैं, जिससे लोग गंभीर रूप से घायल हो रहे हैं।
पीड़ितों को तत्काल इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टर्स ने उनकी स्थिति स्थिर बताते हुए एंटी-रेबीज इंजेक्शन लगाया। चिकित्सकों का कहना है कि इस प्रकार की घटनाओं में देर करना खतरनाक हो सकता है, क्योंकि समय पर उपचार न मिलने से संक्रमण फैलने और जटिलताएँ बढ़ने का खतरा रहता है। कई मामलों में लोगों को अस्पताल में बार-बार फॉलो-अप के लिए भी आना पड़ रहा है। स्वास्थ्य विभाग ने नागरिकों को सलाह दी है कि ऐसी किसी भी स्थिति में तुरंत चिकित्सकीय परामर्श लें और स्वयं उपचार से बचें।
घटना के बाद नगर निगम की कार्यशैली पर सवाल उठना शुरू हो गए हैं। लोगों का आरोप है कि आवारा पशुओं की बढ़ती संख्या पर रोक लगाने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा। निगम द्वारा कई बार ऑपरेशन चलाने की घोषणा की जाती है, लेकिन जमीनी स्तर पर इसका असर सीमित दिखाई देता है। स्थानीय पार्षदों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि शहर की सुरक्षा और साफ-सफाई के लिए जिम्मेदार विभागों को अधिक सक्रिय और जवाबदेह होने की आवश्यकता है। अगर स्थिति पर समय रहते काबू नहीं पाया गया तो यह समस्या और गहरी हो सकती है।

