प्रदेश के एक जिले में पहली बार कमान संभाल रहे सीधी भर्ती के तेज-तर्रार एसपी इन दिनों अपनी एक असाधारण और मानवीय पहल को लेकर सुर्खियों में हैं। चर्चा की वजह कोई सख्त कार्रवाई या बड़ा खुलासा नहीं, बल्कि पुलिसकर्मियों के हित में लिया गया एक ऐसा निर्णय है, जिसने विभाग के भीतर सकारात्मक संदेश दिया है।
सूत्रों के अनुसार, एसपी साहब ने पुलिसकर्मियों के लिए यह योजना तैयार की है कि अब वे अपने जन्मदिन के अवसर पर अवकाश ले सकेंगे। उद्देश्य साफ है—
👉 लगातार तनावपूर्ण ड्यूटी के बीच पुलिसकर्मियों को परिवार और निजी जीवन के लिए भी समय मिल सके।
इतना ही नहीं, योजना के तहत पत्नी और बच्चों के जन्मदिन पर भी सीमित अवकाश की सुविधा देने पर विचार किया गया है, ताकि पुलिसकर्मी अपने जीवन के महत्वपूर्ण पलों में अपनों के साथ मौजूद रह सकें।
सूत्र बताते हैं कि इस पहल की औपचारिक शुरुआत नए वर्ष से की जा सकती है। पुलिस विभाग में इसे एक संवेदनशील और कर्मचारी-हितैषी सुधार के रूप में देखा जा रहा है।
दिलचस्प तथ्य यह है कि ऐसी ही एक योजना कभी कांग्रेस शासनकाल में भी प्रस्तावित की गई थी। तब औपचारिक घोषणा तो हुई, लेकिन सरकार गिरने और प्रशासनिक अस्थिरता के चलते वह योजना फाइलों में ही दफन होकर रह गई।
अब वर्षों बाद, एसपी साहब की इस पहल ने न केवल पुराने प्रस्ताव को जीवित किया है, बल्कि यह संदेश भी दिया है कि
👉 “अनुशासन और संवेदनशीलता साथ-साथ चल सकते हैं।”
अफसरशाही के गलियारों में इस फैसले की सराहना हो रही है और इसे अन्य जिलों के लिए रोल मॉडल माना जा रहा है।

