
कटनी जिले के कैमोर कस्बे में भाजपा नेता नीलू रजक की दिनदहाड़े हत्या ने पूरे मध्य प्रदेश को झकझोर दिया है और स्थानीय स्तर पर भारी जनाक्रोश पैदा कर दिया है। नीलू रजक, जो भाजपा पिछड़ा मोर्चा के मंडल अध्यक्ष थे, को बाइक सवार दो नकाबपोश युवकों ने उस समय गोली मार दी जब वे सार्वजनिक स्थान पर मौजूद थे। उन्हें सिर और सीने में गोली लगी, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। इस घटना के बाद पूरे क्षेत्र में तनाव फैल गया और भाजपा कार्यकर्ताओं ने तीखी प्रतिक्रिया दी। हत्या के पीछे जिन दो आरोपियों के नाम सामने आए — अकरम खान और प्रिंस जोसेफ — उन्हें पुलिस ने कजरवाड़ा क्षेत्र में एक शॉर्ट एनकाउंटर के बाद घायल अवस्था में गिरफ्तार किया। पुलिस के अनुसार, जब उन्हें पकड़ने की कोशिश की गई तो उन्होंने फायरिंग शुरू कर दी, जिसके जवाब में पुलिस ने चार राउंड फायरिंग की और दोनों को घायल कर जबलपुर मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया। इस एनकाउंटर के बाद पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठे, और कैमोर थाना प्रभारी (TI) सहित दो पुलिसकर्मियों को लाइन अटैच कर दिया गया, जिससे यह संकेत मिलता है कि हत्या से पहले सुरक्षा में चूक हुई थी। भाजपा विधायक संजय पाठक ने आरोप लगाया कि आरोपी पहले से ही स्कूल-कॉलेज की छात्राओं से छेड़छाड़ और ‘लव जिहाद’ जैसी गतिविधियों में शामिल थे, और नीलू रजक इनका विरोध करते थे। यह मामला अब केवल एक राजनीतिक हत्या नहीं रह गया है, बल्कि सामाजिक तनाव, प्रशासनिक जवाबदेही और कानून व्यवस्था की गंभीर परीक्षा बन गया है। सरकार और पुलिस प्रशासन पर दबाव है कि वे इस मामले की निष्पक्ष जांच करें, दोषियों को सख्त सज़ा दिलाएं और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस कदम उठाएं। यह घटना दर्शाती है कि राजनीतिक सक्रियता और सामाजिक विरोध के बीच यदि सुरक्षा तंत्र कमजोर पड़ जाए, तो परिणाम बेहद भयावह हो सकते हैं।

