
भोपाल – मध्य प्रदेश में एक दुर्लभ और संवेदनशील चिकित्सा मामला सामने आया है, जहां कार्बाइड गन से आंखों में गंभीर चोट लगने के बाद डॉक्टरों ने मरीज की दृष्टि बचाने के लिए गर्भनाल की झिल्ली (Amniotic Membrane) का उपयोग किया। यह घटना एक स्थानीय युवक के साथ हुई, जो दीपावली के दौरान पटाखों के संपर्क में आया और उसकी आंखों में तेज़ जलन और चोट महसूस हुई।
जांच में पता चला कि युवक की आंखों में कार्बाइड गन के रसायन से गंभीर जलन और ऊतक क्षति हो गई थी। डॉक्टरों ने बताया कि यदि समय पर इलाज न होता तो उसकी दृष्टि स्थायी रूप से जा सकती थी। ऐसे मामलों में सामान्य उपचार पर्याप्त नहीं होता, इसलिए विशेषज्ञों ने गर्भनाल की झिल्ली को आंखों पर प्रत्यारोपित किया, जो ऊतक पुनर्निर्माण और संक्रमण नियंत्रण में मदद करती है।
गर्भनाल की झिल्ली का उपयोग नेत्र चिकित्सा में एक उन्नत और संवेदनशील प्रक्रिया मानी जाती है, जो विशेष रूप से कॉर्नियल डैमेज, अल्सर और रासायनिक जलन के मामलों में की जाती है। यह झिल्ली नवजात शिशु की जन्म के समय की संरचना से ली जाती है और इसे विशेष रूप से संरक्षित किया जाता है ताकि चिकित्सा में उपयोग हो सके।
डॉक्टरों ने बताया कि मरीज की हालत अब स्थिर है और उसकी आंखों की रोशनी धीरे-धीरे लौट रही है। यह मामला न केवल चिकित्सा विज्ञान की प्रगति को दर्शाता है, बल्कि यह भी चेतावनी देता है कि कार्बाइड जैसे खतरनाक रसायनों का उपयोग पटाखों में कितना जानलेवा हो सकता है।

