
मध्य प्रदेश के खंडवा जिले के सिहाड़ा गांव में ज़मीन को लेकर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। वक्फ बोर्ड ट्रिब्यूनल ने पूरे गांव को वक्फ संपत्ति घोषित करते हुए कलेक्टर, सरपंच और पंचायत सचिव को नोटिस जारी किया है। यह गांव लगभग 10,000 की आबादी वाला है और वर्षों से यहां के निवासी अपनी जमीन पर खेती और आवास करते आ रहे हैं। वक्फ बोर्ड के इस दावे के बाद गांव में भारी आक्रोश है। ग्रामीणों का कहना है कि यह जमीन उनके पुरखों की विरासत है और इसे कोई संस्था अपनी संपत्ति कैसे घोषित कर सकती है।
इस विवाद की शुरुआत तब हुई जब ग्राम पंचायत ने गांव में स्थित एक दरगाह को सरकारी जमीन पर अतिक्रमण बताते हुए हटाने का नोटिस जारी किया। पंचायत का तर्क था कि दरगाह की वजह से पंचायत भवन निर्माण में बाधा आ रही है। इसके जवाब में दरगाह समिति ने वक्फ बोर्ड से संपर्क किया और दावा किया कि वह ज़मीन वक्फ संपत्ति है। इसके बाद वक्फ बोर्ड ने पूरे गांव को अपनी संपत्ति बताते हुए कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी।
वक्फ बोर्ड का दावा है कि यह ज़मीन 25 अगस्त 1989 को वक्फ संपत्ति के रूप में पंजीकृत की गई थी। वहीं, ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें इस पंजीकरण की कोई जानकारी नहीं दी गई थी और न ही कभी कोई नोटिस मिला। अब जब पंचायत ने विकास कार्य शुरू किया, तब अचानक यह दावा सामने आया है। ग्रामीणों ने इसे साजिश करार देते हुए कहा है कि वे इस फैसले के खिलाफ न्यायालय का दरवाजा खटखटाएंगे।
यह मामला अब राज्यस्तरीय विवाद बन चुका है और प्रशासन के लिए चुनौतीपूर्ण स्थिति उत्पन्न हो गई है। वक्फ बोर्ड ने संबंधित अधिकारियों को 10 नवंबर को भोपाल स्थित ट्रिब्यूनल में पेश होने का आदेश दिया है। इस बीच, गांव में तनाव का माहौल है और लोग अपने अधिकारों की रक्षा के लिए एकजुट हो रहे हैं।

