
मध्य प्रदेश के मंदसौर जिले में स्थित गांधीसागर अभयारण्य में हाल ही में हुए एक सर्वेक्षण में 45 दुर्लभ प्रजातियों की तितलियों की उपस्थिति दर्ज की गई है। इस सूची में दुनिया की सबसे छोटी तितली ‘ग्रास ज्वेल’ (Grass Jewel) भी शामिल है, जो केवल 1.5 से 2 सेंटीमीटर आकार की होती है। यह सर्वे वन विभाग और जैव विविधता विशेषज्ञों की टीम द्वारा किया गया, जिसमें तितलियों की विविधता, आवास और संरक्षण की संभावनाओं का अध्ययन किया गया।
गांधीसागर अभयारण्य, जो पहले से ही श्यामल और जैविक विविधता से भरपूर माना जाता है, अब तितलियों की दुर्लभ प्रजातियों का सुरक्षित ठिकाना भी बनता जा रहा है। सर्वेक्षण में कॉमन जेझेबेल, ब्लू टाइगर, प्लेन कपिड, स्ट्राइप्ड टाइगर, कॉमन ग्रास यलो जैसी प्रजातियों के साथ-साथ ग्रास ज्वेल की उपस्थिति ने विशेषज्ञों को भी चौंका दिया। यह तितली आमतौर पर शुष्क और झाड़ीदार इलाकों में पाई जाती है और भारत में इसकी संख्या लगातार घट रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इन तितलियों के प्राकृतिक आवास को संरक्षित नहीं किया गया, तो 2030 तक कई प्रजातियां भारत से विलुप्त हो सकती हैं। गांधीसागर जैसे संरक्षित क्षेत्रों में इनकी उपस्थिति यह संकेत देती है कि सतत संरक्षण प्रयासों से जैव विविधता को बचाया जा सकता है। वन विभाग अब इस क्षेत्र को तितली पर्यटन के रूप में विकसित करने की योजना बना रहा है, जिससे न केवल पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि स्थानीय रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे।
यह सर्वे न केवल गांधीसागर की पारिस्थितिकी समृद्धि को दर्शाता है, बल्कि यह भी बताता है कि छोटे-छोटे जीव भी हमारे पर्यावरण संतुलन में कितनी बड़ी भूमिका निभाते हैं। अब जरूरत है कि इन प्रजातियों के संरक्षण के लिए स्थानीय समुदायों को जागरूक किया जाए और प्राकृतिक आवासों को संरक्षित रखने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।

