
मध्य प्रदेश के ग्वालियर जिले के प्रीतम विहार कॉलोनी में सल्फास की जहरीली गैस से दो मासूम बच्चों की दर्दनाक मौत के बाद पूरे राज्य में हड़कंप मच गया है। इस घटना ने प्रशासन को झकझोर दिया है, जिसके बाद भिंड जिले में जिला प्रशासन ने सख्त कदम उठाते हुए सभी कीटनाशक दुकानों पर जांच अभियान शुरू कर दिया है। यदि किसी दुकान पर सल्फास की प्रतिबंधित गोलियां मिलती हैं, तो कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
ग्वालियर की घटना में गेहूं की बोरियों में रखी सल्फास की गोलियों से नमी के कारण फॉस्फीन गैस बनी, जो कूलर की हवा से पूरे कमरे में फैल गई। इससे 4 वर्षीय वैभव और 15 वर्षीय क्षमा शर्मा की मौत हो गई, जबकि उनके माता-पिता गंभीर हालत में ICU में भर्ती हैं। यह हादसा न केवल एक परिवार की त्रासदी है, बल्कि उन सभी घरों के लिए चेतावनी है जो सल्फास जैसी जहरीली दवाओं का घरेलू उपयोग करते हैं।
इस घटना के बाद भिंड जिला प्रशासन ने 15 सदस्यीय निरीक्षण टीम गठित की है, जो जिलेभर की कीटनाशक दुकानों का निरीक्षण करेगी। कृषि विभाग की अगुवाई में यह टीम यह सुनिश्चित करेगी कि कहीं चोरी-छिपे सल्फास की गोलियां तो नहीं बेची जा रही हैं। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी दुकान पर यह प्रतिबंधित सामग्री मिलती है, तो लाइसेंस रद्द करने से लेकर कानूनी कार्रवाई तक की जाएगी।
इस बीच, ग्वालियर में एक अवैध दुकान को सील कर दिया गया है, जहां से सल्फास की गोलियां खरीदी गई थीं। दुकान संचालक फरार है, और पुलिस उसकी तलाश में जुटी है। प्रशासन ने आम जनता से अपील की है कि सल्फास जैसी खतरनाक दवाओं का उपयोग घरेलू स्तर पर न करें, और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत दें।
यह मामला दर्शाता है कि कीटनाशक दवाओं की बिक्री और उपयोग पर सख्त निगरानी की आवश्यकता है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके। साथ ही, जनजागरूकता अभियान चलाकर लोगों को सल्फास के खतरों से अवगत कराना भी जरूरी है।

