
छत्तीसगढ़ सरकार ने अवैध निर्माणों के खिलाफ की जाने वाली प्रशासनिक कार्रवाई के नियमों में बड़ा और ऐतिहासिक बदलाव किया है। अब राज्य में किसी भी मकान, दुकान या अन्य निर्माण को बिना पूर्व सूचना और सुनवाई के तोड़ा नहीं जा सकेगा। यह फैसला नागरिक अधिकारों की रक्षा और प्रशासनिक पारदर्शिता सुनिश्चित करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।
नई व्यवस्था के तहत, प्रशासन को अब हर कार्रवाई से पहले संबंधित व्यक्ति को नोटिस देना होगा, जिसमें उसे अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर मिलेगा। इसके अलावा, कार्रवाई की पूरी प्रक्रिया को रिकॉर्ड में दर्ज करना अनिवार्य होगा, ताकि किसी भी प्रकार की मनमानी या पक्षपात की गुंजाइश न रहे।
इस बदलाव के पीछे सरकार का उद्देश्य है कि कानून का पालन करते हुए भी आम नागरिकों के अधिकारों की रक्षा की जाए। अब तक कई मामलों में बिना पूर्व सूचना के बुलडोजर चलाए जाने से विवाद और जनआक्रोश की स्थिति बनती रही है। नई नीति से न केवल प्रशासन की जवाबदेही तय होगी, बल्कि न्यायिक प्रक्रिया का सम्मान भी सुनिश्चित होगा।
इसके साथ ही, राज्य सरकार ने अवैध प्लॉटिंग और निर्माण को रोकने के लिए जन विश्वास विधेयक 2025 भी लाने की तैयारी की है, जिसके तहत अब सजा की जगह जुर्माने का प्रावधान किया जाएगा।
यह बदलाव शहरी विकास और नागरिक अधिकारों के बीच संतुलन बनाने की दिशा में एक सकारात्मक पहल है, जो अन्य राज्यों के लिए भी उदाहरण बन सकता है।

