
छत्तीसगढ़ में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) को लेकर एक बड़ा घोटाला सामने आया है, जिसमें राशन दुकानों ने राज्य सरकार को ₹46 लाख का नुकसान पहुंचाया। यह मामला तब उजागर हुआ जब साय सरकार की निगरानी टीम ने स्टॉक और वितरण रिकॉर्ड का मिलान किया, और पाया कि 400 क्विंटल चावल गायब है, जिसकी कोई वैध एंट्री या वितरण प्रमाण नहीं मिला। इस घोटाले में तीन लोगों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया गया है, जिनमें एक राशन दुकान संचालक, एक सहकारी समिति सदस्य और एक स्थानीय आपूर्ति अधिकारी शामिल हैं।
जांच में यह भी सामने आया कि फर्जी लाभार्थियों के नाम पर चावल की एंट्री की गई, लेकिन वह वास्तव में कभी वितरित नहीं हुआ। इसके अलावा, स्टॉक रजिस्टर में हेराफेरी, डिजिटल एंट्री में गड़बड़ी, और सत्यापन के दौरान झूठी जानकारी देने जैसे गंभीर अनियमितताएं पाई गईं। यह घोटाला साय सरकार की खाद्य सुरक्षा योजना के तहत गरीबों को मिलने वाले अनाज में की गई सुनियोजित चोरी का उदाहरण है, जिससे न केवल आर्थिक नुकसान हुआ बल्कि जनहित को भी ठेस पहुंची।
राज्य सरकार ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए आरोपियों के खिलाफ FIR दर्ज कर ली है, और विभागीय जांच के आदेश भी दिए गए हैं। साथ ही, यह संकेत दिया गया है कि अन्य जिलों में भी इसी तरह की ऑडिट प्रक्रिया शुरू की जाएगी, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि राशन वितरण प्रणाली पारदर्शी और जवाबदेह बनी रहे। यह घटना दर्शाती है कि नीतिगत योजनाओं के क्रियान्वयन में निगरानी और तकनीकी सत्यापन की भूमिका अब पहले से कहीं अधिक जरूरी हो गई है।

