
छत्तीसगढ़ राज्य उपभोक्ता आयोग में वित्तीय अनियमितता का एक गंभीर मामला सामने आया है, जिसमें आयोग के लेखा प्रभारी पर लगभग 3.98 लाख रुपये की हेराफेरी का आरोप लगाया गया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, नियमित ऑडिट प्रक्रिया के दौरान यह आर्थिक गड़बड़ी पकड़ी गई, जिसके बाद उच्च अधिकारियों ने मामले की विस्तृत जांच के आदेश दिए। प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार, आयोग के खातों से जुड़ी रकम में असामान्य प्रविष्टियाँ और संदिग्ध भुगतान की पुष्टि हुई है, जिसके आधार पर आरोपी कर्मचारी के विरुद्ध गबन का मामला दर्ज किया गया है।
जांच अधिकारियों का कहना है कि यह अनियमितता पिछले कई महीनों से जारी थी, लेकिन नियमित वित्तीय रिकॉर्ड की समीक्षा के बाद संदेह उत्पन्न हुआ। वित्तीय टीम ने लेनदेन संबंधी दस्तावेजों, बैंक स्टेटमेंट और अनुमोदन से जुड़े कागजातों की जांच की, जिसके बाद हेराफेरी की पुष्टि हुई। आरोपी अधिकारी पर आरोप है कि उसने विभिन्न मदों में दर्ज फर्जी खर्च को स्वीकृत करवाकर रकम को गलत तरीके से अपने लाभ के लिए उपयोग किया।
मामला सामने आते ही आयोग प्रशासन ने आरोपी कर्मचारी को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने की अनुशंसा की है, साथ ही सभी संबंधित दस्तावेज और डिजिटल रिकॉर्ड जांच टीम के अधीन कर दिए गए हैं। विभागीय जांच के साथ-साथ पुलिस ने भी प्राथमिकी दर्ज कर आगे की कार्रवाई प्रारंभ कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि आरोपी से पूछताछ के दौरान और भी वित्तीय अनियमितताओं के खुलासे की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

