
भारत सरकार ने दवा कंपनियों के लिए एक कड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाया है। अब यदि कोई फार्मा कंपनी गलत, भ्रामक या फर्जी जानकारी देकर दवा की मंजूरी लेने की कोशिश करती है, तो उसे प्रतिबंधित किया जा सकता है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने 30 अक्टूबर 2025 को एक गजट अधिसूचना जारी कर यह स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में दोषी कंपनियों को लाइसेंस प्रक्रिया से “उचित अवधि” तक के लिए बाहर किया जा सकता है।
यह संशोधन 1945 के मौजूदा ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स रूल्स में किया गया है, जिससे अब केंद्रीय और राज्य स्तर के ड्रग रेगुलेटर्स को अधिकार मिल गया है कि वे किसी भी कंपनी को फर्जी दस्तावेज या डेटा देने पर डिबार कर सकें। यह कदम ऐसे समय पर आया है जब क्लिनिकल ट्रायल डेटा, फार्मा मार्केटिंग और दवा की गुणवत्ता को लेकर कई विवाद सामने आए हैं। सरकार का उद्देश्य है कि दवा की मंजूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता और वैज्ञानिक प्रमाणिकता को प्राथमिकता दी जाए।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह नियम न केवल फार्मा कंपनियों की जवाबदेही बढ़ाएगा, बल्कि जनस्वास्थ्य की सुरक्षा को भी सुनिश्चित करेगा। इससे उन कंपनियों पर लगाम लगेगी जो तेजी से बाजार में प्रवेश पाने के लिए गलत आंकड़े या अधूरी जानकारी प्रस्तुत करती हैं। साथ ही, यह कदम भारत को वैश्विक फार्मा मानकों के अनुरूप लाने की दिशा में भी अहम माना जा रहा है।

