
दिल्ली-NCR में वायु प्रदूषण ने एक बार फिर खतरनाक स्तर पार कर लिया है। सिस्टम ऑफ एयर क्वालिटी एंड वेदर फोरकास्टिंग एंड रिसर्च (SAFAR) के अनुसार, दिल्ली का एक्यूआई 450 के पार पहुंच चुका है, जो गंभीर श्रेणी में आता है। इस हालात को देखते हुए केंद्र सरकार की वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) का तीसरा चरण लागू कर दिया है।
GRAP-3 के तहत निर्माण कार्यों पर रोक, डीजल जनरेटर के इस्तेमाल पर प्रतिबंध, और वाहनों की सख्त निगरानी जैसे कई कदम उठाए गए हैं। सबसे अहम फैसला स्कूलों को लेकर लिया गया है। दिल्ली सरकार ने निर्देश जारी किए हैं कि नर्सरी से कक्षा 5 तक के सभी स्कूल हाइब्रिड मोड में संचालित होंगे, यानी ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों विकल्प उपलब्ध होंगे। छात्रों की उपस्थिति अनिवार्य नहीं होगी, और अभिभावकों की सहमति से ही बच्चे स्कूल आएंगे।
इसके अलावा बाहरी गतिविधियों जैसे खेल, असेंबली और आउटडोर क्लासेस पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया है। प्राइवेट स्कूलों को भी निर्देश दिए गए हैं कि वे हाइब्रिड मोड अपनाएं और बच्चों की सेहत को प्राथमिकता दें। स्वास्थ्य विभाग ने बुजुर्गों, बच्चों और सांस के मरीजों को घर से बाहर न निकलने की सलाह दी है।
यह फैसला ऐसे समय आया है जब दिल्ली में सांस लेना भी मुश्किल हो गया है। स्मॉग की चादर ने शहर को ढक लिया है और दृश्यता बेहद कम हो गई है। प्रदूषण के कारण अस्पतालों में सांस की शिकायत वाले मरीजों की संख्या बढ़ रही है, और मास्क पहनना फिर से जरूरी हो गया है।

