
प्रदेश के बेहद सुसंस्कृत और अनुशासित आईपीएस अधिकारियों में शुमार रहे एक रिटायर्ड प्रमोटी आईपीएस अधिकारी इन दिनों गहरी मानसिक परेशानी से गुजर रहे हैं। वजह कोई प्रशासनिक मामला नहीं, बल्कि उनके ही पड़ोस में बन रही एक आलीशान और विवादित हवेली है, जिसका निर्माण कार्य दिन-रात जारी है।
सूत्रों के अनुसार, निर्माण कार्य की तेज आवाज, भारी मशीनों की आवाजाही और नियमों की खुलेआम अनदेखी के कारण न तो रिटायर्ड आईपीएस अधिकारी दिन में चैन से रह पा रहे हैं और न ही रात में उन्हें या उनके परिवार को सुकून की नींद मिल पा रही है।
बताया जा रहा है कि मजबूर होकर साहब ने इस मामले की शिकायत जिला प्रशासन से लेकर कई जिम्मेदार अधिकारियों तक की, लेकिन हर जगह से उन्हें सिर्फ निराशा ही हाथ लगी। कहीं कार्रवाई फाइलों में अटक गई, तो कहीं सुनवाई ही नहीं हुई।
सूत्रों का दावा है कि इस पूरे मामले की असली वजह हवेली का वह मालिक है, जिसके संबंध कई रिटायर्ड और वर्तमान आईपीएस-आईएएस अधिकारियों से बताए जा रहे हैं। यही कारण है कि जैसे ही किसी स्तर पर कार्रवाई की सुगबुगाहट होती है, तुरंत फोन कॉल्स का दौर शुरू हो जाता है और मामला वहीं ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है।
अफसरशाही के गलियारों में इस बात की भी चर्चा है कि
“कभी जिन आदेशों से पूरा सिस्टम हिल जाया करता था, आज वही साहब अपनी ही परेशानी रोकने के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं।”
यह मामला न केवल प्रशासनिक निष्क्रियता को उजागर करता है, बल्कि यह भी सवाल खड़ा करता है कि क्या रसूख के आगे नियम और कानून बौने साबित हो रहे हैं?
फिलहाल रिटायर्ड आईपीएस अधिकारी चुपचाप हालात झेल रहे हैं और सिस्टम एक बार फिर सवालों के घेरे में है।

