
कमर्शियल गैस सिलेंडर की कमी के चलते लकड़ी की भट्टी और इलेक्ट्रॉनिक चूल्हों का सहारा
बड़वानी: पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध का असर अब जिले में भी दिखने लगा है। कमर्शियल गैस सिलेंडर की कमी ने होटल, रेस्टोरेंट और छोटी चाय-नाश्ते की दुकानों के संचालन को मुश्किल बना दिया है। कुछ दुकानें पहले ही बंद हो चुकी हैं, जबकि कई बंद होने की कगार पर हैं। प्रशासन के आह्वान पर दुकानदार पुराने ईंधन संसाधनों की ओर लौट रहे हैं, जिसमें लकड़ी की भट्टी और इलेक्ट्रॉनिक चूल्हों का उपयोग शामिल है।
हालांकि, लकड़ी की उपलब्धता है लेकिन इसके दामों में 30 से 40 प्रतिशत की बढ़ोतरी हो गई है। कोयले की मांग और दाम भी तेजी से बढ़ रहे हैं। कारंजा चौपाटी पर फास्ट फूड, चाय और नाश्ते की दुकानों पर इसका अधिक असर पड़ा है, जहां कमर्शियल सिलेंडर का ही उपयोग होता था।
- शादी सीजन में बढ़ेगी मुसीबत: शादी के सीजन में ईंधन की कमी से मैरेज गार्डन और केटरर्स के लिए चुनौती खड़ी हो गई है। डीजल और लकड़ी भट्टियों का उपयोग समय-साध्य है, जिससे आयोजन में दिक्कतें आ सकती हैं।
- इंडक्शन चूल्हे की बढ़ती मांग: कमर्शियल सिलेंडर की कमी और घरेलू सिलेंडर की बढ़ती मांग के बीच इंडक्शन चूल्हों की बिक्री बढ़ गई है। इसके चलते इनके दाम भी बढ़ रहे हैं और पहले से बुकिंग की जा रही है।
- तवा रोटी की जगह तंदूर रोटी: रेस्टोरेंट संचालक रवि सुगंधी के अनुसार, लकड़ी के चूल्हे पर खाना बनाने में अधिक समय लग रहा है, जिससे ग्राहकों को समय पर सेवा नहीं मिल पा रही है।









