
छत्तीसगढ़ के बिलासपुर क्षेत्र में हुए हालिया ट्रेन हादसे ने रेलवे सुरक्षा और ट्रैफ़िक प्रबंधन को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शुक्रवार देर रात यह दुर्घटना तब हुई जब एक यात्री ट्रेन तेज़ रफ़्तार से गुजर रही थी और उसी ट्रैक पर आगे खड़ी एक अन्य ट्रेन या वैगन के साथ उसका टकराव हो गया। टक्कर इतनी ज़ोरदार थी कि कई डिब्बे क्षतिग्रस्त हो गए और कुछ पटरी से भी उतर गए। घटना के तुरंत बाद यात्रियों की चीख-पुकार के बीच आसपास के ग्रामीण मदद के लिए पहुँच गए और स्थानीय पुलिस, जिला प्रशासन तथा रेलवे अधिकारियों को सूचना दी गई। प्रारंभिक रिपोर्टों में बताया गया है कि हादसे का कारण सिग्नलिंग में गड़बड़ी या ट्रैक क्लियरेंस की देरी हो सकती है, हालांकि रेलवे ने जांच के बाद ही अंतिम रिपोर्ट जारी करने की बात कही है।
हादसे के बाद रातभर बचाव कार्य जारी रहा। घटनास्थल पर एनडीआरएफ, रेलवे पुलिस और मेडिकल टीमों की तैनाती करते हुए फंसे हुए यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। रेलवे अधिकारियों के अनुसार, कई यात्रियों को गंभीर चोटें आई हैं, जिनका उपचार नज़दीकी अस्पतालों में किया जा रहा है। प्रशासन ने घायलों के परिवारों से संपर्क स्थापित करने के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं। घटनास्थल पर मौजूद अधिकारियों का कहना है कि क्षतिग्रस्त डिब्बों की स्थिति को देखते हुए मृतकों का आंकड़ा बढ़ने की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता। इसके साथ ही, वहां मौजूद भीड़ और मीडिया के दबाव के बीच राहत दलों ने सर्च ऑपरेशन में तेजी लाई है ताकि सभी यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाला जा सके। इस हादसे के चलते रेलवे ट्रैक पर लंबे समय तक परिचालन बाधित रहा और कई ट्रेनों को या तो कैंसिल किया गया या वैकल्पिक मार्गों से डायवर्ट किया गया। यात्रियों को प्लेटफॉर्म और कोचों में घंटों इंतज़ार करना पड़ा, जिससे असुविधा और बेचैनी बढ़ी। कुछ यात्रियों ने रेलवे से असंतोष जताते हुए कहा कि हादसे के बाद तुरंत सूचना और दिशा-निर्देश उपलब्ध नहीं कराए गए। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि ऐसी परिस्थितियों में किसी प्रकार की अफवाह या दहशत फैलने से बचाने के लिए जानकारी नियंत्रित तरीके से दी जाती है। वहीं रेलवे ने भरोसा दिलाया है कि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए सिग्नलिंग सिस्टम, संचार और ट्रैक मॉनिटरिंग प्रक्रियाओं में सुधार लाया जाएगा।

