
मध्य प्रदेश की बीना विधानसभा सीट से कांग्रेस की टिकट पर निर्वाचित विधायक निर्मला सप्रे की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। राजनीतिक पाला बदलने के बाद अब उनकी विधायकी पर कानूनी तलवार लटक रही है। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने विधायक सप्रे और विधानसभा अध्यक्ष को नोटिस जारी किया है, जिसमें पूछा गया है कि क्यों न उनकी सदस्यता रद्द कर दी जाए।
यह मामला तब उठा जब नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर आरोप लगाया कि निर्मला सप्रे ने कांग्रेस की सदस्यता छोड़कर भाजपा का दामन थाम लिया, और इसके बावजूद उनकी विधानसभा सदस्यता बरकरार है। उन्होंने दावा किया कि यह संविधान की दसवीं अनुसूची यानी दल-बदल विरोधी कानून का उल्लंघन है, और विधानसभा अध्यक्ष ने इस पर कोई कार्रवाई नहीं की।
याचिका में यह भी कहा गया है कि निर्मला सप्रे ने लोकसभा चुनाव के दौरान भाजपा के पक्ष में प्रचार किया, जो कांग्रेस पार्टी के खिलाफ गतिविधि मानी जाती है। कांग्रेस ने इस पर आंतरिक अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग की थी, लेकिन मामला अब न्यायिक स्तर पर पहुंच गया है।
हाईकोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए रजिस्ट्रार को निर्देश दिए हैं कि याचिका की जांच कर इसे सूचीबद्ध किया जाए, और अगली सुनवाई की तारीख 8 अक्टूबर 2025 तय की गई है। इस बीच, राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं कि क्या सप्रे की विधायकी रद्द होगी, और यदि ऐसा होता है तो बीना सीट पर उपचुनाव की संभावना बन सकती है।
निर्मला सप्रे ने भाजपा की सदस्यता मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मौजूदगी में सार्वजनिक रूप से ली थी, जिससे यह मामला और अधिक संवेदनशील हो गया है। भाजपा ने अभी तक इस मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, जबकि कांग्रेस इसे लोकतंत्र और संविधान की रक्षा का मामला बता रही है।

