
क्या है यह योजना?
भारत के कुछ राज्यों में राज्य सरकारें बेटियों के जन्म, शिक्षा और भविष्य को आर्थिक रूप से समर्थन देने के लिए स्कीमें चला रही हैं, जिनके तहत बेटियों के नाम खाता खोलकर (यानी बैंक अकाउंट में) ₹50,000 तक की वित्तीय सहायता दी जाती है। इसका उद्देश्य लिंग अनुपात में सुधार, बेटियों के जन्म को बढ़ावा देना और उनके शिक्षा‑भविष्य को मज़बूत करना है।
मुख्य उदाहरण: मुख्यमंत्री राजश्री / लाडो प्रोत्साहन योजना
- राजस्थान सरकार पहले ‘मुख्यमंत्री राजश्री योजना’ के नाम से इस योजना को चला रही थी। अब इसे ‘लाडो प्रोत्साहन योजना’ के नाम से जारी किया गया है।
- इस योजना के तहत बेटी के खाते में कुल ₹50,000 तक की सहायता दी जाती है।
- यह राशि कई किस्तों में दी जाती है — जैसे जन्म के समय, स्कूल में प्रवेश पर और शिक्षा की प्रगति के दौरान।
- कई राज्यों में दूसरी आर्थिक सहायता या किराया‑भत्ते भी अलग‑अलग दिए जाते हैं, लेकिन ₹50,000 जैसा बेसिक इनाम इसी तरह की योजनाओं में आम है।
क्या यह केंद्र सरकार की योजना है?
नहीं।
- यह कोई केंद्र‑सरकारी योजना (जैसे केंद्र द्वारा सीधे ₹50,000 देने वाली योजना) नहीं है, बल्कि राज्य सरकारों द्वारा चलाई जा रही योजनाओं का हिस्सा है। ऐसे कई योजनाएँ राज्यों की तरफ़ से उपलब्ध हैं।
कौन ले सकता है फायदा? (Eligibility)
योजना के लाभार्थी‑किरायें राज्यों के नियमों पर निर्भर करते हैं, लेकिन सामान्य तौर पर:
✔️ बच्ची का जन्म उसी राज्य में होना
✔️ परिवार का आधार‑आधार बैंक खाता संयोजन
✔️ शिक्षा‑उम्र तक पहुंचने पर नियमित स्कूलों में नामांकन और उपस्थिती होना
✔️ योजना के अंतर्गत दी जाने वाली किस्तों के लिए समय‑समय पर आवश्यक दस्तावेज़ जमा करना
ध्यान दें: हर राज्य के नियम अलग हो सकते हैं, इसलिए लाभ लेने से पहले उस राज्य के अधिकारिक पोर्टल या महिला एवं बाल विकास विभाग से जांच करना ज़रूरी है।
ये योजना किसलिए है?
🎯 बेटियों के जन्म को प्रोत्साहित करना
🎯 लिंगानुपात में सुधार
🎯 पढ़ाई‑लिखाई को बढ़ावा देना
🎯 आर्थिक सहायता के ज़रिये महिलाओं के सशक्तिकरण को बढ़ावा देना

