
भारतीय निवेशकों का सोने के प्रति लगाव अब केवल आभूषणों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अब यह गोल्ड एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स (Gold ETFs) के रूप में भी तेजी से उभर रहा है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (WGC) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, अक्टूबर 2025 में भारत में गोल्ड ETF में $850 मिलियन (लगभग ₹7,000 करोड़) का शुद्ध निवेश दर्ज किया गया, जो एशिया में दूसरा सबसे बड़ा मासिक निवेश है। इस साल अब तक भारत में गोल्ड ETF में कुल निवेश $3.05 बिलियन तक पहुंच चुका है—जो अब तक का सर्वाधिक वार्षिक निवेश है।
इस निवेश प्रवृत्ति ने भारत को ग्लोबल गोल्ड ETF मार्केट में तीसरे स्थान पर ला खड़ा किया है, जहां अमेरिका ($6.33 बिलियन) और चीन ($4.51 बिलियन) पहले और दूसरे स्थान पर हैं। भारत का एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) अब $11.3 बिलियन तक पहुंच गया है, जो दर्शाता है कि निवेशक सोने को एक सुरक्षित निवेश विकल्प के रूप में देख रहे हैं, खासकर वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और मुद्रास्फीति के दौर में।
दिलचस्प बात यह है कि 2022 में गोल्ड ETF में केवल $33 मिलियन का निवेश हुआ था, जो 2023 में बढ़कर $310 मिलियन और 2024 में $1.29 बिलियन हो गया। 2025 में यह आंकड़ा तीन गुना से अधिक बढ़ चुका है, जो दर्शाता है कि निवेशकों का रुझान पारंपरिक निवेश साधनों से हटकर अब डिजिटल और सुरक्षित विकल्पों की ओर बढ़ रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह उछाल केवल सोने की कीमतों में वृद्धि के कारण नहीं है, बल्कि गोल्ड ETF की तरलता, पारदर्शिता और टैक्स लाभ जैसे कारकों ने भी इसमें अहम भूमिका निभाई है। इसके अलावा, त्योहारों के मौसम में सोने की पारंपरिक मांग और दिवाली जैसे अवसरों पर निवेश की प्रवृत्ति ने भी इस ट्रेंड को बल दिया है।
हालांकि अक्टूबर में निवेश सितंबर की तुलना में 6% कम रहा, फिर भी यह लगातार पांचवां महीना था जब गोल्ड ETF में सकारात्मक प्रवाह दर्ज किया गया। मार्च और मई को छोड़कर 2025 के हर महीने में निवेशकों ने गोल्ड ETF में रुचि दिखाई है।

