
भोपाल। झीलों की नगरी भोपाल एक बार फिर ऐतिहासिक गौरव का साक्षी बनने जा रही है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) द्वारा आयोजित ‘विश्व हिंदू सम्मेलन‘ के माध्यम से न केवल भारत, बल्कि संपूर्ण विश्व के हिंदुओं को एकजुटता और वैचारिक प्रखरता के सूत्र में पिरोने की तैयारी है। श्री गुरुजी (गोलवलकर) के महान संकल्पों से लेकर वर्तमान सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी के मार्गदर्शन तक, संघ निरंतर समाज में सांस्कृतिक चेतना और राष्ट्रवाद का संचार कर रहा है।
सनातन संस्कृति का वैश्विक उदय
यह सम्मेलन केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि ‘वसुधैव कुटुंबकम‘ की भावना को धरातल पर उतारने का एक सशक्त प्रयास है। संघ का लक्ष्य स्पष्ट है—जाति, पंथ और क्षेत्रों की सीमाओं को तोड़कर संपूर्ण हिंदू समाज को एक विराट पहचान के नीचे लाना। भोपाल में होने वाला यह कार्यक्रम इसी कड़ी का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो देशभर के विभिन्न प्रांतों से होते हुए अब मध्य प्रदेश की राजधानी में अपनी आभा बिखेरेगा।
दिग्गज विभूतियों का समागम: समाज को मिलेगी नई दिशा
इस महा-सम्मेलन की गरिमा को बढ़ाने के लिए प्रख्यात कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा जी जैसे आध्यात्मिक नेतृत्व और समाज के विभिन्न क्षेत्रों के गणमान्य नागरिक सम्मिलित हो रहे हैं। संतों के सानिध्य और विचारकों के विमर्श से यह मंच समाज को ‘स्व‘ का बोध कराएगा।
सम्मेलन के प्रमुख स्तंभ:
- हिंदू एकता: देश-विदेश में रह रहे हिंदुओं के बीच आपसी सामंजस्य और सहयोग को बढ़ाना।
- सांस्कृतिक सजगता: आने वाली पीढ़ी को सनातन मूल्यों और गौरवशाली इतिहास से परिचित कराना।
- वैचारिक नेतृत्व: वर्तमान वैश्विक चुनौतियों के बीच हिंदू जीवन दृष्टि के माध्यम से समाधान प्रस्तुत करना।
“हिंदू समाज का संगठित होना किसी के विरोध में नहीं, बल्कि संपूर्ण विश्व के कल्याण और शांति के लिए अनिवार्य है।” — यह विचार इस सम्मेलन की मूल आत्मा है।
उच्च विचारधारा और सामाजिक समरसता
भोपाल का यह कार्यक्रम समाज के हर वर्ग को एक साथ लाने का संदेश दे रहा है। इसमें होने वाले बौद्धिक सत्र और सांस्कृतिक विमर्श हिंदू समाज को अपनी जड़ों की ओर लौटने और एक शक्तिशाली राष्ट्र निर्माण में अपनी भूमिका सुनिश्चित करने की प्रेरणा देंगे। संघ की यह पहल न केवल धार्मिक जागृति है, बल्कि एक सामाजिक क्रांति भी है जो ऊंच-नीच के भेद को समाप्त कर समरस समाज की नींव रख रही है।

