
मध्य प्रदेश के कई जिलों में अक्टूबर के अंत और नवंबर की शुरुआत में आई बेमौसम बारिश और तूफानी हवाओं ने किसानों के लिए गंभीर संकट खड़ा कर दिया है। शिवपुरी, श्योपुर, भिंड, ग्वालियर, सतना और रीवा जैसे जिलों में धान की खड़ी फसल, जो कटाई के लिए तैयार थी, भारी बारिश और जलभराव के कारण बर्बाद हो गई।
मौसम विभाग के अनुसार, यह बारिश पूर्व मध्य अरब सागर में सक्रिय चक्रवाती प्रणाली के कारण हुई, जिसने प्रदेश में सामान्य मौसम चक्र को बाधित कर दिया। खेतों में पानी भरने से न केवल धान, बल्कि सोयाबीन, उड़द, सरसों, मटर और तिल जैसी फसलें भी प्रभावित हुई हैं। कई इलाकों में धान की बालियां गल गईं, जिससे उत्पादन में भारी गिरावट की आशंका है।
किसानों का कहना है कि कटाई से ठीक पहले फसल का नष्ट होना आर्थिक रूप से तबाही जैसा है। कई परिवारों ने कर्ज लेकर खेती की थी और अब उन्हें मुआवजे की उम्मीद है। श्योपुर जिले में तो किसानों ने प्रशासन से आपदा राहत और फसल बीमा के तहत तत्काल सहायता की मांग की है।
राज्य सरकार ने नुकसान का आकलन करने के लिए राजस्व और कृषि विभाग की संयुक्त टीमें भेजी हैं। अधिकारियों ने बताया कि फसल नुकसान का सर्वे जल्द पूरा कर लिया जाएगा और प्रभावित किसानों को मुआवजा और बीमा क्लेम दिलाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

