
मध्य प्रदेश में प्रशासनिक व्यवस्था को ठगने की एक चौंकाने वाली साजिश का खुलासा हुआ है, जहां तीन लोगों ने खुद को राज्य के मुख्य सचिव बताकर कलेक्टर को फोन किया और सरकारी काम में हस्तक्षेप करने की कोशिश की। यह फर्जीवाड़ा तब सामने आया जब कलेक्टर को फोन पर दिए गए निर्देश संदिग्ध लगे और उन्होंने इसकी पुष्टि के लिए उच्च अधिकारियों से संपर्क किया। जांच में पाया गया कि फोन कॉल पूरी तरह फर्जी था, और इसके पीछे एक संगठित गिरोह काम कर रहा था।
पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया, जिनमें एक व्यक्ति ने खुद को मुख्य सचिव बताया, जबकि बाकी दो ने तकनीकी और लॉजिस्टिक सहायता दी। आरोपियों ने फर्जी नंबर, सरकारी भाषा और दबाव बनाने की रणनीति अपनाकर कलेक्टर से एक विशेष कार्य को जल्द पूरा करने की मांग की थी — जो संभवतः किसी निजी लाभ या साजिश से जुड़ा था।
यह मामला दर्शाता है कि प्रशासनिक पदों की आड़ में फर्जीवाड़ा करने वाले अपराधी अब तकनीकी और मनोवैज्ञानिक हथकंडों का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिससे सरकारी तंत्र की विश्वसनीयता पर खतरा मंडराने लगता है। ऐसे मामलों में सतर्कता, सत्यापन और साइबर सुरक्षा उपायों की भूमिका बेहद अहम हो जाती है।

