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रेवड़ी कल्चर का अंत! कर्ज नहीं, ‘कमाई’ वाला मॉडल… डॉ. मोहन यादव ने 2 साल में कैसे बदल दी मध्य प्रदेश की तकदीर?

मध्य प्रदेश की राजनीति के इतिहास में अक्सर चेहरे बदलते रहे, वादे बदलते रहे, लेकिन प्रदेश कीकर्ज की कुंडलीऔरबेरोजगारी का रोनाकभी खत्म नहीं हुआ। लेकिन पिछले दो सालों में विंध्याचल और सतपुड़ा की पहाड़ियों के बीच एक नई गूंज सुनाई दे रही है। यह गूंज हैविकास की, विश्वास की और डॉ. मोहन यादव केविजनकी!

जहाँ पहले की सरकारेंमुफ्त की रेवड़ियांबांटकर और भारीभरकम कर्ज लेकर वाहवाही लूटने में व्यस्त थीं, वहीं डॉ. मोहन यादव ने सत्ता संभालते ही यह साफ कर दिया किमध्य प्रदेश अब मांगेगा नहीं, बल्कि कमाएगा।

मुफ्तखोरी पर लगाम, रोजगार को सलाम

डॉ. मोहन यादव शायद प्रदेश के पहले ऐसे मुख्यमंत्री हैं, जिन्होंने कर्ज लेकर घी पीने की पुरानी परंपरा को तोड़ा है। उन्होंने साफ समझा कि प्रदेश का भलाफ्रीकी योजनाओं से नहीं, बल्कि फैक्ट्रियों के धुएं और युवाओं के हाथों में काम से होगा।

एक सच्चा विचारक वही है जो आने वाली पीढ़ी की चिंता करे, न कि केवल आने वाले चुनाव की। डॉ. मोहन यादव ने प्रदेश के ऊपर लदे कर्ज के बोझ को कम करने के लिएइन्वेस्टमेंट और इंडस्ट्रीका जो मास्टरस्ट्रोक खेला है, उसने अर्थशास्त्रियों को भी चौंका दिया है। वे बेरोजगारों के लिए मसीहा बनकर उभरे हैं, जिन्होंने युवाओं को भत्ता नहीं, बल्कि भविष्य देने की ठानी है।

2 साल: ‘मोहनमंत्र और औद्योगिक क्रांति (विकास का रिपोर्ट कार्ड)

पिछले 2 सालों में डॉ. मोहन यादव की सरकार ने जो किया, वह पिछले कई दशकों में नहीं हुआ। यहाँ देखिए उनके विकास कार्यों का एक छोटा लेकिन दमदार वर्णन:

रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव (Regional Industry Conclave): केवल इंदौर या भोपाल नहीं, बल्कि उज्जैन, जबलपुर, ग्वालियर, सागर और रीवा जैसे शहरों में इंवेस्टर समिट आयोजित कर उद्योगों को हर जिले तक पहुँचाया।

कर्ज मुक्त रोडमैप: अनावश्यक सरकारी खर्चों पर कैंची चलाई और उस पैसे को इंफ्रास्ट्रक्चर और स्किल डेवलपमेंट में लगाया, जिससे राज्य की आय (State Revenue) के नए स्रोत खुले।

स्टार्टअप और नवाचार: प्रदेश के युवाओं को नौकरी मांगने वाला नहीं, बल्कि नौकरी देने वाला बनाने के लिए नई स्टार्टअप नीति लागू की।

माइनिंग और टूरिज्म में उछाल: प्रदेश की छिपी हुई संपदा (माइनिंग) और पर्यटन को ग्लोबल स्तर पर लाकर राजस्व में भारी वृद्धि की।

सख्त प्रशासन, सरल जीवन: अपराधियों पर बुलडोजर और व्यापारियों के लिए रेड कार्पेटयही हैमोहन सरकारका असली मॉडल।

एक नया सूरज

कहा जाता है किनेता अगले चुनाव के बारे में सोचता है, लेकिन राजनेता अगली पीढ़ी के बारे में सोचता है।डॉ. मोहन यादव ने साबित कर दिया है कि वे एक सच्चे राजनेता और समाज के प्रति चिंतित अभिभावक हैं।   आज मध्य प्रदेश की हवाओं में बदलाव है। यह बदलाव है उस सोच का, जो मानती है कि मध्य प्रदेश भारत का ग्रोथ इंजन बन सकता है। डॉ. मोहन यादव की यह कार्यशैली न केवल विरोधियों के मुंह पर ताला लगा रही है, बल्कि प्रदेश की जनता को यह भरोसा दिला रही है कि—”हां, अब हमारा भविष्य सुरक्षित हाथों में है।

gaurav
Author: gaurav

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    One thought on “रेवड़ी कल्चर का अंत! कर्ज नहीं, ‘कमाई’ वाला मॉडल… डॉ. मोहन यादव ने 2 साल में कैसे बदल दी मध्य प्रदेश की तकदीर?

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