
नई दिल्ली: आज के संसद के सत्र से पहले, Narendra Modi ने विपक्ष को साफ इशारा दिया — संसद सिर्फ प्रदर्शन और नाटक का मंच नहीं, बल्कि जनता को परिणाम देने का फ़ोरम है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस सत्र में कामकाज और समाधान प्राथमिकता होना चाहिए, न कि शोर-शराबा। 
पीएम ने कहा कि देश का लोकतंत्र मजबूत है, लेकिन उसी लोकतंत्र का सम्मान करते हुए सदन को सार्थक बनाना होगा। उन्होंने सुझाव दिया कि यदि संसद में केवल “नाटक” होगा, तो लोकतंत्र की गरिमा गिर सकती है। उनके अनुसार, इस सत्र में चाहे SIR-BLO विवाद हो या अन्य संवेदनशील मुद्दे — उन्हें तर्क और निष्पक्ष बहस से हल करना चाहिए।
वहीं, विपक्षी दलों का कहना है कि लोकतंत्र सिर्फ नुमाइश के लिए नहीं है — जनता के सवालों और शिकायतों को संसद तक पहुँचाना ज़रूरी है। वे चाहते हैं कि सत्र में SIR-मतदाता सूची, कृषक, पर्यावरण, सामाजिक न्याय जैसे मुद्दों पर खुली और गहराई से बहस हो। अगर सरकार कार्य-सूची छोटा रखती है या बहस को सीमित करती है — तो आरोप हो सकते हैं कि लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को कमजोर किया जा रहा है।
इस बीच, केंद्रीय नेतृत्व का कहना है कि सरकार सभी पक्षों की सुनने को तैयार है और सदन का सुव्यवस्थित संचालन चाहेगी। लेकिन पहले दिन से ही यह स्पष्ट हो गया है कि इस सत्र की शुरुआत राजनीति और शब्दों की लड़ाई से नहीं — मुद्दों और असलियत से होगी।

