
मध्य प्रदेश के सागर जिले के शुक्रवारी और शनिचरी मोहल्लों से हिंदू परिवारों का पलायन बीते कुछ वर्षों से लगातार जारी है। इन मोहल्लों में कभी मिश्रित आबादी हुआ करती थी, लेकिन अब ये मुस्लिम बहुल इलाकों में तब्दील हो चुके हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार, माहौल में बदलाव, धार्मिक असहिष्णुता, और आए दिन के विवादों ने हिंदू परिवारों को अपने घर छोड़ने पर मजबूर कर दिया है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, पिछले पांच वर्षों में करीब 68 हिंदू परिवार इन मोहल्लों से पलायन कर चुके हैं। आरोप है कि मोहल्लों में मस्जिदों, मदरसों, मांस की दुकानों और कबाड़ के धंधों की बढ़ती संख्या के चलते गलियों में तनाव का माहौल बन गया है। कई परिवारों ने बताया कि रोजमर्रा की जिंदगी में टकराव, धमकी और सामाजिक दबाव के कारण उन्होंने अपनी संपत्ति औने-पौने दामों में बेचकर अन्य कॉलोनियों में शरण ली।
इस गंभीर स्थिति पर हिंदू संगठनों की भूमिका भी सवालों के घेरे में है, क्योंकि वे केवल रिपोर्ट भेजने और बयान जारी करने तक सीमित नजर आए हैं। न तो कोई ठोस पुनर्वास योजना सामने आई है, न ही प्रशासन पर दबाव बनाने की कोई ठोस रणनीति। स्थानीय लोगों का कहना है कि राजनीतिक और सामाजिक संगठनों की निष्क्रियता ने पलायन की प्रक्रिया को और तेज कर दिया है।
प्रशासन की ओर से हालांकि यह कहा गया है कि संपत्ति पंजीयन और सुरक्षा व्यवस्था पर नजर रखी जा रही है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि धार्मिक असंतुलन और सामाजिक तनाव के चलते मोहल्लों में रहने वाले हिंदू परिवार खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।
यह मामला केवल एक शहर या दो मोहल्लों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक व्यापक सामाजिक चिंता का संकेत है, जहां धार्मिक संतुलन, सामाजिक समरसता और प्रशासनिक सक्रियता की परीक्षा हो रही है। यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो यह प्रवृत्ति अन्य क्षेत्रों में भी फैल सकती है।

