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27 Bison Relocated to Bandhavgarh Tiger Reserve | बंधवगढ़ में बाइसन स्थानांतरण का दूसरा चरण पूरा

भोपाल | 27 जनवरी — मध्य प्रदेश में वन्यजीव संरक्षण कार्यक्रम के तहत गौर (Indian Bison) को उनके मूल आवासों में सुरक्षित रूप से पुनर्स्थापित किए जाने का अभियान तेज हो गया है। गणतंत्र दिवस के अवसर पर इस परियोजना के दूसरे चरण में कुल 27 बाइसन को बांधवगढ़ टाइगर रिज़र्व में सफलतापूर्वक स्थानांतरित किया गया।

वन विभाग और वन्यजीव विशेषज्ञों की टीम ने इसे संरक्षण प्रयासों में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया है। अधिकारियों का कहना है कि यह पहल प्रदेश में जैव विविधता और प्रजाति संतुलन को बहाल करने के लिए बेहद ज़रूरी है।


📦 दो चरणों में पूरा हुआ स्थानांतरण

अभियान के पहले चरण में पिछले वर्ष बाइसन को कान्हा टाइगर रिज़र्व से बांधवगढ़ लाया गया था। इस चरण में बाइसन की स्वास्थ्य जांच, व्यवहारिक अनुकूलता और आदतों की निगरानी जैसे पहलुओं को प्राथमिकता दी गई थी।

दूसरे चरण में 27 बाइसन — जिनमें नर, मादा और कुछ किशोर आयु वर्ग के जानवर शामिल थे — को विशेष ट्रांसलोकेशन वाहनों से बांधवगढ़ पहुंचाया गया। अधिकारियों ने बताया कि पूरी प्रक्रिया के दौरान पशु चिकित्सकों, जीवविज्ञानियों और सुरक्षा कर्मियों की टीम तैनात रही।


🌿 क्यों ज़रूरी था यह स्थानांतरण?

बांधवगढ़ में बाइसन आबादी वर्षों पहले खत्म हो चुकी थी। इस परियोजना का उद्देश्य:

  • नई आबादी स्थापित करना
  • जंगल में चराई संतुलन बनाए रखना
  • शाकाहारी प्रजातियों के वितरण में सुधार
  • टॉप–प्रिडेटर (बाघ) के लिए शिकार आधार मजबूत करना

वन्यजीव विशेषज्ञों के मुताबिक, बाइसन की मौजूदगी से इकोसिस्टम अधिक संतुलित होता है और इससे टाइगर रिज़र्व में शिकार-शिकारी चक्र भी बेहतर तरीके से चलता है।


🏞️ बांधवगढ़ की तैयारी

स्थानांतरण से पहले बांधवगढ़ टाइगर रिज़र्व में:

  • चराई क्षेत्रों की पहचान
  • जल स्रोतों की मैपिंग
  • साइंटिफिक प्रोटोकॉल के अनुसार एनक्लोजर निर्माण
  • गश्त बढ़ाने
  • कैमरा ट्रैप और ट्रैकिंग व्यवस्था

जैसे प्री-रेडीनेस मॉड्यूल तैयार किए गए थे। विभाग ने यह भी बताया कि आने वाले छह महीनों में बाइसन के व्यवहार और स्वास्थ्य की लगातार मॉनिटरिंग होगी।


🧬 Wildlife Corridors पर भी नजर

परियोजना का अगला लक्ष्य बांधवगढ़ और कान्हा के बीच वाइल्डलाइफ कॉरिडोर को मजबूत बनाना है, जिससे भविष्य में प्रजातियों का प्राकृतिक आदान–प्रदान संभव हो सके। अधिकारियों ने संकेत दिया कि आने वाले वर्षों में कुछ और प्रजातियों पर भी इसी तरह के प्रोजेक्ट चलाए जा सकते हैं।


🎯 निष्कर्ष

गणतंत्र दिवस पर इस दूसरे चरण के पूरा होने के साथ मध्य प्रदेश ने वन्यजीव पुनर्स्थापन में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया है। विशेषज्ञ इसे प्रदेश के संरक्षण मॉडल के लिए मील का पत्थर मान रहे हैं।

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