
कभी उत्तर भारत के सबसे प्रभावशाली कारोबारी समूहों में शुमार जयप्रकाश एसोसिएट्स (JP Group) आज दिवालिया प्रक्रिया से गुजर रहा है। जयप्रकाश गौड़, जो एक समय भारत के 70वें सबसे अमीर व्यक्ति माने जाते थे, उनका साम्राज्य अब वेदांता ग्रुप को बेचने की कगार पर है। सवाल उठता है—आखिर कैसे 7,582 करोड़ की कंपनी इस हाल में पहुंच गई?
जयप्रकाश एसोसिएट्स ने यमुना एक्सप्रेसवे, नोएडा और ग्रेटर नोएडा में टाउनशिप, पॉवर प्लांट्स और सीमेंट फैक्ट्रियों जैसे मेगा प्रोजेक्ट्स से अपनी पहचान बनाई थी। लेकिन अत्यधिक कर्ज, गलत निवेश निर्णय और अधूरी परियोजनाएं इस साम्राज्य के पतन का कारण बनीं। रियल एस्टेट सेक्टर में मंदी और ग्राहकों को समय पर फ्लैट न देना कंपनी की साख पर भारी पड़ा। ICICI बैंक और अन्य कर्जदाताओं ने जब भुगतान न मिलने पर राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (NCLT) में याचिका दायर की, तब जाकर दिवालिया प्रक्रिया शुरू हुई।
अब वेदांता ग्रुप ने 17,000 करोड़ रुपये की बोली लगाकर इस कंपनी को खरीदने की तैयारी कर ली है। यह सौदा अगर पूरा होता है, तो जयप्रकाश गौड़ का साम्राज्य पूरी तरह कर्जदाताओं के नियंत्रण में चला जाएगा। यह कहानी न केवल एक कारोबारी पतन की दास्तान है, बल्कि भारतीय रियल एस्टेट और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में जोखिम और जवाबदेही की भी चेतावनी है।

