
भारत और अफगानिस्तान के बीच द्विपक्षीय संबंधों में एक नया और ऐतिहासिक मोड़ तब आया जब काबुल में अफगान-हिन्दू रिसर्च सेंटर खोलने की घोषणा की गई। यह केंद्र न केवल सांस्कृतिक और ऐतिहासिक शोध को बढ़ावा देगा, बल्कि भारत-अफगानिस्तान के साझा विरासत, धार्मिक संबंधों और सामाजिक समन्वय को भी मजबूत करेगा। इस पहल को भारत सरकार की ओर से अफगानिस्तान में स्थिरता और पुनर्निर्माण के प्रयासों के तहत देखा जा रहा है, खासकर ऐसे समय में जब तालिबान शासन के बाद भारत ने अपनी रणनीतिक नीति में बदलाव किया है।
रिसर्च सेंटर का उद्देश्य अफगानिस्तान में बसे हिंदू और सिख समुदायों के इतिहास, योगदान और चुनौतियों पर शोध करना है, साथ ही दोनों देशों के बीच शिक्षा, संस्कृति और नीति संवाद को बढ़ावा देना है। यह केंद्र अफगानिस्तान के युवाओं को भारत के साथ जुड़ने का एक नया मंच देगा, जहां वे शोध, स्कॉलरशिप और सांस्कृतिक आदान-प्रदान के माध्यम से द्विपक्षीय सहयोग को मजबूत कर सकेंगे।
भारत पहले ही अफगानिस्तान में हाइड्रोपावर, स्वास्थ्य, शिक्षा और बुनियादी ढांचे से जुड़े कई प्रोजेक्ट्स पर काम कर रहा है। हाल ही में दुबई में भारत के विदेश सचिव और अफगानिस्तान के कार्यवाहक विदेश मंत्री के बीच हुई बैठक ने इस सहयोग को और गति दी है। भारत ने स्पष्ट किया है कि वह अफगान जनता के साथ खड़ा है और मानवीय सहायता, पुनर्निर्माण और सांस्कृतिक संरक्षण में सक्रिय भूमिका निभाना चाहता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह रिसर्च सेंटर भारत की सॉफ्ट पावर डिप्लोमेसी का हिस्सा है, जो अफगानिस्तान में पाकिस्तान के प्रभाव को संतुलित करने और क्षेत्रीय स्थिरता को बढ़ावा देने की दिशा में एक अहम कदम है

