
इंदौर में प्रस्तावित 64 किलोमीटर लंबी पश्चिमी रिंग रोड परियोजना अब एक साल की देरी का शिकार हो चुकी है। यह सड़क महू से हातोद और हातोद से क्षिप्रा तक दो हिस्सों में बनाई जानी है, जिसे सिंहस्थ 2028 को ध्यान में रखते हुए तैयार किया जा रहा था। लेकिन जनवरी 2025 में शुरू होने वाला निर्माण कार्य अब नवंबर 2025 तक भी शुरू नहीं हो पाया है, और अगले दो से तीन महीनों तक इसके शुरू होने की संभावना नहीं दिख रही है।
इस देरी के पीछे मुख्य कारण किसानों का विरोध और मुआवजा वितरण में अनियमितता है। अब तक केवल 55 प्रतिशत किसानों को ही मुआवजा राशि दी गई है, और उनमें से भी कई किसान असंतुष्ट हैं क्योंकि उन्हें बाजार मूल्य से कम भुगतान मिला है। कुल 638 हेक्टेयर भूमि इस परियोजना के लिए अधिग्रहित की गई है, जिसमें 472 हेक्टेयर निजी, 98 हेक्टेयर सरकारी और 50 हेक्टेयर वन भूमि शामिल है। वन भूमि में इंदौर वन मंडल की 40 हेक्टेयर और धार की 8–10 हेक्टेयर जमीन आती है।
निर्माण एजेंसी का चयन डेढ़ साल पहले ही कर लिया गया था, लेकिन जमीन अधिग्रहण और किसानों की नाराजगी के चलते काम शुरू नहीं हो पाया। इस परियोजना की लागत 1500 करोड़ रुपये आंकी गई है, और इसे एनएचएआई द्वारा क्रियान्वित किया जाना है। प्रशासनिक स्तर पर प्रयास जारी हैं कि जल्द से जल्द सभी किसानों को उचित मुआवजा देकर निर्माण कार्य शुरू किया जा सके, ताकि सिंहस्थ जैसे बड़े आयोजन से पहले यह रिंग रोड तैयार हो सके।

