
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर में आयोजित एकता पदयात्रा के दौरान राज्य के सभी स्कूलों में राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ को अनिवार्य करने का ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि यह केवल एक गीत नहीं, बल्कि भारत माता के प्रति सम्मान, राष्ट्रीय एकता और देशभक्ति की भावना का प्रतीक है। यह निर्णय सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती के अवसर पर लिया गया, जिसे भारत की अखंडता और एकता के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है।
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा, “वंदे मातरम का विरोध करना न केवल गलत है, बल्कि यही विरोध कभी भारत के विभाजन का कारण भी बना था।” उन्होंने स्पष्ट किया कि कोई भी व्यक्ति, जाति, मत या मजहब राष्ट्र से बड़ा नहीं हो सकता, और हर नागरिक के मन में भारत माता के प्रति श्रद्धा और गर्व की भावना होनी चाहिए।
योगी आदित्यनाथ ने यह भी कहा कि अब हर शिक्षण संस्थान में प्रतिदिन वंदे मातरम का गायन अनिवार्य होगा ताकि बच्चों के मन में देशभक्ति और मातृभूमि के प्रति प्रेम की भावना मजबूत हो सके। इस फैसले को लेकर राजनीतिक और धार्मिक हलकों में प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं। देवबंदी उलेमा मौलाना कारी इसहाक गोरा ने कहा कि इस्लाम वंदे मातरम गाने की इजाजत नहीं देता, लेकिन उन्होंने यह भी जोड़ा कि मुल्क से मोहब्बत दिल के अंदर होनी चाहिए।
यह निर्णय शिक्षा व्यवस्था में राष्ट्रवाद को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि राष्ट्रगीत का सम्मान करना हर नागरिक का कर्तव्य है और शिक्षण संस्थानों में इसकी शुरुआत बच्चों के स्तर से होनी चाहिए।

