
भारत और बोत्सवाना के बीच वन्यजीव संरक्षण को लेकर एक बड़ा समझौता हुआ है, जिसके तहत बोत्सवाना भारत को 8 कालाहारी चीते सौंपेगा। यह समझौता राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की तीन दिवसीय राजकीय यात्रा के दौरान हुआ, जो बोत्सवाना की राजधानी गाबोरोने में संपन्न हुई। यह यात्रा न केवल भारत-बोत्सवाना संबंधों को नई ऊंचाई पर ले गई, बल्कि ‘प्रोजेक्ट चीता’ को भी एक नया आयाम मिला है।
राष्ट्रपति मुर्मू की यह यात्रा ऐतिहासिक रही क्योंकि यह किसी भारतीय राष्ट्रपति की बोत्सवाना की पहली राजकीय यात्रा थी। गाबोरोने पहुंचने पर उन्हें 21 तोपों की सलामी और गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। इस दौरान बोत्सवाना के राष्ट्रपति ड्यूमा गिदोन बोको ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। दोनों देशों के बीच वन्यजीव संरक्षण, व्यापार और निवेश जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी।
प्रोजेक्ट चीता के तहत भारत पहले ही नामीबिया और दक्षिण अफ्रीका से चीते ला चुका है, जिन्हें मध्यप्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में बसाया गया है। अब बोत्सवाना से आने वाले ये 8 चीते इस परियोजना को और मजबूती देंगे। ये चीते कालाहारी रेगिस्तान की नस्ल के हैं, जो अपनी तेज रफ्तार और अनुकूलन क्षमता के लिए जाने जाते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इन चीतों की भारत में पुनर्स्थापना जैव विविधता को समृद्ध करने में मदद करेगी।
इस समझौते से यह भी स्पष्ट होता है कि भारत वन्यजीव संरक्षण के वैश्विक प्रयासों में एक अग्रणी भूमिका निभा रहा है। यह कदम न केवल पर्यावरणीय दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि भारत की सॉफ्ट पावर डिप्लोमेसी को भी मजबूती प्रदान करता है। आने वाले महीनों में इन चीतों को भारत लाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी, जिसके लिए दोनों देशों के वन्यजीव विशेषज्ञ मिलकर काम करेंगे।

