
छात्रों और अभिभावकों को राहत देने के लिए सरकार ने निजी स्कूलों की मनमानी पर रोक लगाने का बड़ा कदम उठाया है। अब स्कूल प्रबंधन यूनिफार्म, किताबें, पाठ्य सामग्री और फीस को लेकर अपनी मनमर्जी नहीं चला पाएंगे। लंबे समय से अभिभावक शिकायत कर रहे थे कि निजी स्कूल महंगी किताबें और यूनिफार्म तय कर देते हैं, जिससे परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ता है। इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए प्रशासन ने स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि स्कूलों को पारदर्शिता अपनानी होगी और अभिभावकों पर अनावश्यक दबाव नहीं बनाया जा सकेगा।
नए नियमों के तहत स्कूलों को यह सुनिश्चित करना होगा कि यूनिफार्म और किताबें सामान्य बाजार दर पर उपलब्ध हों और अभिभावक अपनी सुविधा के अनुसार इन्हें खरीद सकें। साथ ही फीस संरचना को भी नियंत्रित किया जाएगा ताकि शिक्षा का अधिकार केवल आर्थिक रूप से सक्षम परिवारों तक सीमित न रह जाए। यह कदम शिक्षा व्यवस्था में संतुलन और न्याय सुनिश्चित करने की दिशा में अहम माना जा रहा है। अभिभावकों का मानना है कि इससे शिक्षा अधिक सुलभ और किफायती बनेगी, जबकि छात्रों को भी समान अवसर मिलेंगे।

