
इंदौर शहर में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को आधुनिक और सुरक्षित बनाने के लिए प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया है। निर्णय लिया गया है कि अब 15 साल से अधिक पुरानी बसों को सड़कों पर चलने की अनुमति नहीं दी जाएगी। परिवहन विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि इन बसों को न तो नया परमिट मिलेगा और न ही फिटनेस सर्टिफिकेट जारी किया जाएगा। यह कदम यात्रियों की सुरक्षा और प्रदूषण नियंत्रण को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है।
अधिकारियों के अनुसार, पुरानी बसें न केवल तकनीकी रूप से कमजोर हो चुकी हैं बल्कि प्रदूषण का स्तर भी बढ़ा रही थीं। कई बार इन बसों में अचानक खराबी आने से यात्रियों की जान जोखिम में पड़ती थी। अब प्रशासन ने तय किया है कि शहर में केवल वही बसें चलेंगी जो निर्धारित मानकों पर खरी उतरेंगी। इससे यातायात व्यवस्था को भी सुगम बनाने में मदद मिलेगी और यात्रियों को सुरक्षित व आरामदायक सफर मिलेगा।
स्थानीय नागरिकों और यात्रियों ने इस फैसले का स्वागत किया है। उनका कहना है कि पुरानी बसों की जगह नई और बेहतर सुविधाओं वाली गाड़ियाँ आने से सफर का अनुभव बदल जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम इंदौर को स्मार्ट सिटी की दिशा में और आगे ले जाएगा, साथ ही पर्यावरण संरक्षण में भी योगदान देगा।

