
मध्य प्रदेश में प्रॉपर्टी खरीदना अब महंगा हो सकता है, क्योंकि प्रदेशभर में नई कलेक्टर गाइडलाइन तैयार करने का काम शुरू कर दिया गया है। राजस्व विभाग और जिला प्रशासन टीमों ने अलग-अलग क्षेत्रों में जमीन के दामों का आकलन शुरू कर दिया है, ताकि वित्तीय वर्ष 2026 के लिए नई दरें फाइनल की जा सकें।
सूत्रों के अनुसार, इस बार कई शहरों और तेज़ी से विकसित हो रहे इलाकों में प्रॉपर्टी रेट में बढ़ोतरी लगभग तय मानी जा रही है। खासकर वे क्षेत्र जहाँ पिछले साल निर्माण कार्य, व्यावसायिक गतिविधियों और रियल एस्टेट की मांग में तेज़ वृद्धि दर्ज की गई है।
अधिकारियों का कहना है कि नई कलेक्टर गाइडलाइन तैयार करने का उद्देश्य जमीन और प्रॉपर्टी के वास्तविक बाजार मूल्य का सही आकलन करना है, ताकि रजिस्ट्रेशन और स्टाम्प शुल्क की प्रक्रिया पारदर्शी रहे। इस प्रक्रिया में आवासीय, व्यावसायिक और कृषि भूमि, तीनों ही श्रेणियों के रेट अलग-अलग स्तर पर रिव्यू किए जा रहे हैं।
रियल एस्टेट विशेषज्ञों का मानना है कि गाइडलाइन रेट बढ़ने से फ्लैट, प्लॉट और कमर्शियल स्पेस का कुल मूल्य भी बढ़ जाएगा। इससे नए खरीदारों पर खर्च का बोझ बढ़ सकता है, जबकि निवेशकों को लंबी अवधि में बेहतर रिटर्न की उम्मीद रहेगी।
नई दरों को अंतिम रूप देने के बाद इन्हें अगले वित्तीय वर्ष से लागू किया जाएगा। प्रशासन ने आम जनता, बिल्डर्स और स्थानीय निकायों से भी सुझाव लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी है, ताकि गाइडलाइन अधिक व्यावहारिक और क्षेत्रीय जरूरतों के अनुरूप हो।

